Kedarnath Mandir, केदारनाथ मंदिर, प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर, 2021

 

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केदारनाथ मंदिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी मेरे इस लेख में जिसमें मैं आज आपको केदारनाथ मंदिर के बारे में बताऊँगा। केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकनी नदी के किनारे पर स्थित है। केदारनाथ मंदिर शिव भक्तों के लिए सबसे प्रमुख स्थानों में से एक है I यह मंदिर हिमालय की निचली पर्वत श्रंखला और घाटी के बीच में बना हुआ है। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए अति दर्शनीय और पूज्यनीय मंदिर हैकेदारनाथ मंदिर के कपाट मेष संक्रांति के 15 दिन बाद खुलते हैं और अघन्य संक्रांति के बाद बल राज की रात को यहाँ पुजा की जाती है, और प्रत्येक वर्ष भय्या दूज को सुबह को केदार जी की पुजा करके उनको घ्रतकमल और कपड़ों में लपेट कर मंदिर के दरवाजों को बंद कर देते हैं। मंदिर को बंद करने के बाद श्री केदार की पंच मुखी प्रतिमा को उखीमथ लाया जाता हैऔर कपाट खुलने तक प्रतिदिन यहाँ पर इस प्रतिमा की पुजा की जाती है I

 

विषय सूची

1-  केदारनाथ मंदिर का धार्मिक इतिहास।

2-  केदारनाथ मंदिर का इतिहास।

3-  केदारनाथ मंदिर की वास्तुकला

4-  केदारनाथ मंदिर का खुलने का समय।

5-  केदारनाथ जाने का सबसे अच्छा समय।

6-  केदारनाथ मंदिर आसपास के दर्शनीय स्थल।

7-   पंच केदार।

8-   केदारनाथ मंदिर की आपदा।

9-   केदारनाथ मंदिर में कैसे पहुँचें ?

 

केदारनाथ मंदिर का धार्मिक इतिहास Religious History of Kedarnath Temple

केदारनाथ मंदिर के बारे में धार्मिक ग्रन्थों और पोराणिक कथाओं में बताया गया है कि महाभारत का युद्ध जीतने के बाद पांडवों पर भ्रात हत्या का पाप लग गया था। तो उस पाप से मुक्त करने के लिए पांडवों ने भगवान शिव से प्रार्थना कि परन्तु भगवान शिव पांडवों को इस अधर्म के लिए इतनी आसानी से मुक्त नहीं करना चाहते थे। तो उन्होने एक बैल का रूप धारण कर हिमालय की पहाड़ियों में जाकर बैलों के झुंड में मिल गए, जिस से कोई उनको पहचान न सकेपांडव भगवान शिव को खोजते-खोजते उस बैलों के झुंड के पास पहुँच गएपांडवों को उस झुंड पर संदेह हुआ तो भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दोनों पहाड़ियों पर अपने पैर फैला दियेयह सब देख कर सभी गाय-बैल भीम के पैर के नीचे से निकल गए।

लेकिन वह बैल जो खुद भगवान शिव थे उनको भीम के पैरों के नीचे से निकलना मंजूर नहीं था। यह सब देख कर भीम को उस बैल पर संदेह हुआ, तो भीम ने उस बैल को पकड़ना चाहा तो बैल धरती के अंदर समाने लगा। भीम ने जल्दी से उस बैल के पीठ पर बने कूबड़ को पकड़ लियापांडवों की सच्ची भक्ति देखकर भगवान शिव उनसे प्रसन्न हुये और उन्होंने पांडवों को दर्शन दे कर उस पाप से मुक्त कर दियाउसी दिन से भगवान शिव बैल की पीठ पर बने कूबड़ के आकार के पिंड रूप में श्री केदारनाथ धाम में पूजे जाते हैकेदार नाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है I 

 

केदारनाथ मंदिर का इतिहास History of Kedarnath Temple

हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार केदारनाथ मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भ्रात हत्या पाप से मुक्त होने और अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद इस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया था। जिसे केदारनाथ मंदिर के नाम से जाना गया। कई शताब्दियों तक यह मंदिर इसी हाल में रहा। बाद में इस मंदिर की खोज 8 वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य जी ने की थी। मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण इनके द्वारा ही किया गया है। यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग है। 

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जानिए प्रमुख चारधामों के बारे में

 केदारनाथ मंदिर की वास्तुकला Architecture of Kedar Nath Temple

केदारनाथ मंदिर के निर्माण कत्युरी शैली के अनुसार किया गया हैमंदिर के मुख्य भाग में मंडप और गर्भ गृह हैं। यह मंदिर 6 फीट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है I मंदिर में पहुँचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया है, और उसके चारों ओर एक प्रदक्षिणा पथ है। मंदिर के गर्भ गृह में एक नकुली चट्टान स्थित है जो सदाशिव के रूप में पूजी जाती हैमंदिर के बाहर नंदी बैल भगवान शिव जी के वाहन के रूप में स्थित हैं। इस मंदिर के प्रागण द्रोपदी सहित पाँच पांडवो की विशाल मूर्ति भी स्थित है। केदार नाथ में मुख्य मंदिर की ऊंचाई 85 फीट, चौड़ाई 187 फीट और मंदिर की दीवारें 12 फीट मोटी हैं। इस मंदिर को बहुत बड़े – बड़े पत्थरों से बनाया गया है। सभी पत्थरों को एक समान रूप में तराशा गया है।  इस मंदिर की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 3582 मीटर हैयह मंदिर तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। 

             

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहास 


केदारनाथ मंदिर का खुलने का समय Kedarnath temple opening time

केदारनाथ मंदिर पूरे साल में छह महीने के लिए खुलते हैं। यह मंदिर मई के महीने गर्मियों में खुलता है और अक्टूबर के महीने सर्दियों की शुरुवात में बंद हो जाता है। प्रतिदिन मंदिर खुलने और बंद होने का समय।

मंदिर खुलने का समय - सुबह 3:00 बजे।

सुबह की आरती का समय – सुबह 4:00 बजे।

शाम की आरती का समय – शाम 4:00 बजे।

मंदिर बंद होने का समय – रात्री 10:00 बजे।

यह मंदिर दिन में दोपहर 3 बजे से शाम को 5 बजे तक 2 घंटे के लिए बंद रहता है।

 

केदारनाथ जाने का सबसे अच्छा समय Best time to visit Kedarnath

केदारनाथ मंदिर पूरे वर्ष में सिर्फ 6 महीने के लिए खुलता है। यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय अगस्त के अंतिम सप्ताह और सितम्बर के महीने में होता है। यह मंदिर मई के महीने में खुलता है लेकिन जून और जुलाई के महीने बरसात का समय होने के कारण यहाँ प्राकर्तिक आपदाओं का अधिक खतरा रहता है। मंदिर खुलने के समय शुरुवात में यहाँ बहुत अधिक भीड़ भाड़ रहती है। लेकिन सितम्बर के महीने में यहाँ भीड़ भी कम हो जाती हैऔर मौसम भी अच्छा रहता है तो आप इस समय आसानी और बहुत अच्छे तरीके से मंदिर के दर्शन कर सकते हो।

 

केदारनाथ मंदिर आसपास के दर्शनीय स्थल kedarnath temple nearby places to visit

अगर आप केदारनाथ मंदिर गए हैं और आप उसके आस पास की कुछ और जगहों में घुमना चाहते हो तो कुछ प्रमुख जगहों के बारे में हमने नीचे बताया है आप वहाँ जाकर घूम सकते हैं।

1- त्रियुगीनारायण मंदिर

त्रियुगीनारायण मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में विराजमान एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है। यह सुरम्य गांव में स्थित है। इस मंदिर की समुद्र तल से 1,980 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ पर आप गढ़वाल क्षेत्र के बर्फ से ढके सुंदर पहाड़ों को देख सकते हो। यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण त्रियुगीनारायण का मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर की वास्तुकला बद्रीनाथ मंदिर के समान है। यह मंदिर केदारनाथ मंदिर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

2- ऊखीमठ

ऊखीमठ रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से 1317 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऊखीमठ सर्दियों के समय में भगवान केदारनाथ का घर है। सर्दियों के दौरान जब केदारनाथ का मंदिर बंद हो जाता हैतो श्री केदार जी की पुजा आराधना इसी मंदिर में की जाता है। ऊखीमठ में मुख्य रूप से रावल लोग रहते हैंजो केदारनाथ के मुख्य पुजारी हैं। यहाँ से आप हिमालय श्रृंखला की बर्फ से ढकी चोटियां को देखकर उनका आनंद उठा सकते हो। केदारनाथ मंदिर से इस मंदिर की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है।

3- चोपटा

चोपटा एक शानदार हिल स्टेशन है। इसे उत्तराखंड का उत्तराखंड के मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। यहाँ का वातवरण बहुत ही शांत है। अगर आप शहर की शोरगुल भरी ज़िंदगी से परेशान हो गए हो तो आपको एक बार इस हिल स्टेशन में जरूर आना चाहिए। यहाँ सुबह का शानदार दृश्य जब सूरज की लाल किरणें बर्फ से लदी हिमालय की चोटियों में पड़ती हैतो बहुत ज्यादा आनन्दित करती है। केदारनाथ से चोपटा की दूरी लगभग 43 किलोमीटर है।

4- तुंगनाथ

तुंगनाथ मंदिर चंद्रनाथ पर्वत पर विराजमान दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। यह उत्तराखंड में स्थित पंच केदार मंदिर में से एक है। तुंगनाथ मंदिर की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 3680 मीटर है। यह मंदिर 1000 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। केदार्णयह मंदिर से इसकी दूरी लगभग 31 किलोमीटर है।

5- वासुकी ताल झील

वासुकी ताल झील उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर से भी ऊपर स्थित एक उच्च हिमनद झील है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से  लगभग 4328 मीटर है। यह झील ब्रह्म कमल के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ दुनियाँ के सबसे दुर्लभ प्रजाति के ब्रह्म कमल पाये जाते है। इस झील में ब्रह्म कमल के अलावा और भी हिमालयी फूल देखने को मिलते हैं।

 

पंच केदार 

पंच केदार भगवान शिव को समर्पित पाँच मंदिरों का एक समूह है, जिसे पंच केदार कहा जाता है। महाभारत के युद्ध के बाद जब पांडव भगवान शिव के पास क्षमा याचना के लिए आए तो भगवान शिव उन्हे माफ नहीं करना चाहते थे। पांडवों से बचने के लिए उन्होंने एक बैल का रूप धारण कर लिया था। बाद में जब पांडवों ने उनको पहचान कर पकड़ लिया तो उनके शरीर के अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे थे। जिसे वर्तमान में पंच केदार के नाम से जाना जाता है। केदारनाथ में उनका कूबड़ प्रकट हुआ, तुंगनाथ में भुजाएँ प्रकट हुईं, मध्यमहेश्वर में नाभि प्रकट हुई, रुद्रनाथ में चेहरा और कल्पेश्वर में सिर और बाल प्रकट हुए थे। पांडवों ने इन सभी स्थानों पर मंदिरों का निर्माण किया था।

 

केदारनाथ मंदिर की आपदा Kedarnath temple disaster

साल 2013 में उत्तराखंड बाढ़ आयी थी। जिसने केदारनाथ में बहत अधिक तबाही मचाई थी। इस बाढ़ का मुख्य कारण इस मंदिर के ऊपर बनी झील का फटना था। झील के टूटने के कारण उसका जल बहुत तीव्र गति से नीचे को आया और उससे मंदिर के आस पास के जितने भी घर,मकान और होटल थे उन सब को तबाह कर दिया थालेकिन इस बाढ़ से मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ मंदिर में कुछ हल्की सी दरारें आई थी। बाढ़ का पानी आगे जाकर अलकनंदा में मिला और उसने भी बहुत अधिक तबाही मचाई। इस त्रासदी को पूरा देश कभी नहीं भूल सकता है।

 

केदारनाथ मंदिर में कैसे पहुँचें How to reach Kedarnath Temple ?

हवाई मार्ग से केदारनाथ मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डे जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी 238 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से केदारनाथ मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 102 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से केदारनाथ मंदिर तक पहुँचने के आप गौरीकुण्ड तक टॅक्सीबस या अपने वाहन से पहुँच सकते हैंगौरीकुण्ड से केदार नाथ धाम तक पहुँचने के लिए आपको पैदल चलना होता है अगरआप चाहें तो घोड़ा या पालकी बुक कर के आगे के सफर का आनंद ले सकते हो।  

Kedarnath Temple Road Map
Kedarnath Temple Road Map

केदारनाथ मंदिर के पास स्थित होटल kedarnath temple near hotel

केदारनाथ मंदिर के पास स्थित होटलों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है। यह सभी होटल मंदिर के आस पास ही स्थित है। आप अपनी सुविधानुसार नीचे दिये गए किसी भी होटल में रुक सकते हैं-

1- Kedar Valley Resorts.

2- Hotel New Basera.

3- Behl Ashram Hotel.

4- Agra Bhawan.

5- Bhopal Bhawan.

6- Swargarohini Cottages.

7- Kedar River Retreat.

8- Kedarnath Meerut Mandal and Mewar Sadan.

9- GMVN COTTAGES.

10- Shivalik Valley Resorts.

 

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको केदारनाथ मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैंआप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

 Note        

अगर आपके पास केदारनाथ मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैंया आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं। 

  

FAQ

Q- केदारनाथ मंदिर कहाँ पर स्थित है ?

A- केदारनाथ मंदिर भारत देश के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित है।

Q- केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ?

A- केदारनाथ मंदिर का निर्माण सर्वप्रथम पांडवों ने किया था लेकिन आधुनिक मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा किया गया था।

Q- केदारनाथ मंदिर का निर्माण किस शैली में हुआ है ?

A- केदारनाथ मंदिर कत्युरी शैली में किया गया है।  

Q- केदारनाथ मंदिर  की ऊंचाई कितनी है ?

A- केदारनाथ मंदिर की ऊंचाई 85 फीट है।


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