Mahakaleshwar Jyotirlinga In Hindi, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, 2021

 

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में जानकारी 

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का मेरे इस लेख में जिसमें मैं आज आपको महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में बताऊंगा। यह ज्योतिर्लिंग मध्य-प्रदेश राज्य के मालवा में शिप्रा नदी के किनारे पर बसे उज्जैन नामक स्थान में स्थित है। यह शहर भारत की सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी के नाम से विख्यात है। यहाँ भगवान शिव का तीसरा ज्योतिर्लिंग विराजमान हैजिसे महाकालेश्वर के नाम से जाना जाता है। इसे शहर को प्राचीन समय से अलग-अलग नामों से जैसे उज्जैनीअमरावतीकुशस्थलीकनकश्रंगा और अवन्तिका आदि नामों से जाना जाता है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों और वेद पुराणों में जिन सप्तपुरी (सात मोक्ष दायी नगरों) का वर्णन है। उन सात नगरों में से एक नगर उज्जैन भी है। प्राचीनकाल में उज्जैन में हजारों मंदिरों का निर्माण किया गया था इसलिए उज्जैन को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है। इस स्थान पर महादेव महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त चौरासी लिंगो में अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं।

 

विषय सूची

1-  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व।

2-  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास।

3-  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की वास्तुकला।

4-  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का खुलने का समय।

5-  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कुछ रहस्य।

6-  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास के दर्शन स्थल।

7-  महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में कैसे पहुँचें ?

 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व (religious significance)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में शिव पुराण में बताया गया हैकि प्राचीन समय में अवन्ती नगरी में एक ब्राह्मण रहा करते थे। उन्होने अपने घर में अग्नि-कुंड की स्थापना की थी और नियमित रूप से वैदिक कर्मों के अनुष्ठान में लगे रहते थे। वह भगवान शिव के परम-भक्त थे। वह ब्राह्मण प्रतिदिन पार्थिव लिंग का निर्माण कर शास्त्रीय विधि से उस लिंग की पुजा पाठ किया करते थे। उस शिव भक्त ब्राह्मण का नाम वेदप्रिय था। भगवान शिव जी के क्रपा से वेदप्रिय को चार पुत्रों की प्राप्ति हुयी। वेदप्रिय के सभी पुत्र तेजस्वी और विद्वान थे। उन चारों पुत्रों का नाम देवप्रियप्रियमेघासंस्क्र्त और सुव्रत थे। उन दिनों रत्नमाल पर्वत पर दूषण नाम के एक राक्षस ने धर्मात्माओं और ऋषि-मुनियों पर आक्रमण कर दिया था। उस राक्षस को भगवान ब्रह्मा जी से अजेयता का वर प्राप्त था। सभी ऋषि-मुनियों को सताने के बाद उस राक्षस ने भारी सेना ले कर अवन्ती नगर के धर्मात्माओं और ऋषि-मुनियों पर भी आक्रमण कर दिया। उन राक्षसों ने चारों दिशाओं में भयंकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया लेकिन अवन्ती नगर के सभी शिव भक्त नागरिक उनके आतंक से भयभीत नहीं हुये।

अवन्ती नगर के नागरिकों को दुखी देख कर उन चारों शिव भक्तों (देवप्रियप्रियमेघासंस्क्र्त और सुव्रत) ने नगरवासियों से कहा कि आप लोग भक्तों के हित कारी भगवान शिव पर भरोसा रखें वह हम सभी की रक्षा करेंगेंफिर चारों शिव भक्त भगवान शिव की पुजा अर्चना कर उनकी भक्ति में लीन हो गये। उन भक्तों को भगवान शिव की पूजा करता देख सभी राक्षस वहाँ पर पहुंच गए और उन्हे मारने के लिए जैसे ही शस्त्र उठाया तो उस स्थान पर भयंकर आवाज के साथ एक बहुत बड़ा गड्डा हो गया। उस गड्डे से भयंकर रौद्र रूप धारी भगवान शिव उत्पन्न हुए और उन्होने उन राक्षसों से कहा अरे दुष्टो मैं तुम जैसे राक्षसों का नाश करने के लिए ही महाकाल के रूप में उत्पन्न हुआ हूँ। उन्होने अपनी एक फुँकार मात्र से उन राक्षसों के विनास कर दिया और दूषण नामक राक्षस का वध कर दिया।

सभी राक्षसों को खत्म करने के बाद उन शिव भक्त ब्राह्मणों से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने कहा कि मैं महाकाल महेश्वर तुम लोगों की भक्ति से प्रसन्न हूँ तुम लोग जो वर मागना चाहते हो मांग लो। भगवान शिव की यह बात सुन कर उन ब्राह्मण पुत्रों ने हाथ जोड़कर कहा - दुष्टों को दंड देने वाले महाकाल शंभू नाथ आप हम चारों भाइयों को इस जीवन मरण के चक्र से मुक्त कर दो और आम जनता के कल्याण व उनकी रक्षा करने के लिए आप यहीं पर विराजमान हो जाएँ। भगवान शिव उनकी बात मान कर उसी गड्डे में ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गये।

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फोटो - महाकालेश्वर मंदिर



मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में यहाँ पढ़े 

 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास (History)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के इतिहास के बारे में  कहा जाता है कि 12 वीं शताब्दी में उज्जैन में एक युद्ध के दौरान इस मंदिर परिसर को सुल्तान इल्तुतमिश ने नष्ट कर दिया था। बाद में  पेशवा बाजीराव प्रथम ने इस मन्दिर की देख-रेख का कार्य अपने वफादार सेनापति  रानोजी शिंदे को सौंपा था। रानोजी शिंदे के दीवान सुखतानकर रामचंद्र एक बहुत धनी थे। जिन्होंने अपनी संपत्ति को धार्मिक उद्देश्य के लिए इस  मन्दिर के निर्माण कार्य में लगाने का फैसला किया। इस मंदिर के वर्तमान संरचना के स्थापना मराठा सेनापति रानोजी शिंदे ने सन 1734 ईस्वी में करवाई थी। रानोजी शिंदे और उनकी पत्नी बैजा बाई सहित उनके वंश के अन्य सदस्यों द्वारा मंदिर का आगे का विकास कार्य और प्रबंधन की देख रेख की गई। बाद में जयजीराव शिंदे के शासनकाल दौरान सन 1886 ईस्वी तक ग्वालियर राज्य के प्रमुख कार्यक्रम इसी मंदिर में हुआ करते थे। आजादी के बाद इस मन्दिर कि देख-रेख का कार्य उज्जैन नगर निगम के पास चला गया। आजकल यह मन्दिर उज्जैन जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय के अधीन है।

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फोटो - महाकालेश्वर मंदिर



महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की वास्तुकला (Architecture)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का निर्माण नागर शैली के अनुसार किया गया है। यह मन्दिर परिसर पाँच एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मन्दिर के परिसर के अंदर 53 छोटे-बड़े मन्दिर स्थित हैं। यह मंदिर तीन मंजिला इमारत में बना है। मंदिर के सबसे निचले, मध्य और ऊपरी हिस्सों में क्रमशः महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और नागचंद्रेश्वर के लिंग विराजमान हैं। सबसे ऊपरी तल में विराजमान नागचंद्रेश्वर साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी के दिन खुलता है। भू-तल पर ओंकारेश्वर भगवान विराजमान हैं, और सबसे नीचे तल या मन्दिर का गर्भ गृह यहाँ का सबसे पवित्र स्थान जहां पर स्वयं भगवान महाकाल महाकालेश्वर के रूप में निवास करते हैं। गर्भगृह में ज्योतिर्लिंगम, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और माता पार्वती की मूर्तियाँ स्थित हैं। मंदिर परिसर में कोटि तीर्थ नामक एक कुंड भी स्थित है, और मंदिर के बगल से इस कुंड के लिए सीढ़ियाँ जाती हैं। 

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फोटो - महाकालेश्वर मंदिर



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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का खुलने का समय (Opening Time)

यह ज्योतिर्लिंग प्रतिदिन सुबह 4 बजे खुलता है और रात 11 बजे बंद हो जाता है। इस दौरान मंदिर में कई तरह के अनुष्ठान किए जाते हैं। जो भी भक्त चाहता है वह इन अनुष्ठानों का हिस्सा हो बन सकता है। यह मंदिर दोपहर में दोपहर के भोजन के लिए बंद रहता है। मंदिर में पूजा पाठ का समय इस प्रकार है।

मंदिर में दर्शन का समय सुबह 4:00 बजे से रात्री 11:00 बजे तक।

भस्म आरती सुबह 4:00 बजे से  6:00 बजे तक।

प्रातः पूजा का समय सुबह 7:00 बजे से 7:30 बजे तक।

संध्या पूजा का समय शाम को 5:00 बजे से 5:30 बजे तक।

महाकाल की आरती का समय शाम को 7:00 बजे से 7:30 बजे तक।

 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कुछ रहस्य (Secrets)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में स्थित शिव लिंग की आरती भस्म (राख) से की जाती है, जिसे भस्म आरती कहते हैं। मान्यता है कि पहले यह राख शमशान घाट से आती थी परंतु अब यह राख कबीला गाय के गोबर के कंडे और पेड़ के छालों से बनाई जाती है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने अपने भक्त मार्कन्डेय के प्राण बचाने के लिए मृत्यु के देवता यमराज को पराजित किया था और महा मृत्युंजय मंत्र का जाप पहली बार मार्कन्डेय ने ही किया था। आज भी मृत्यु का भय दूर करने के लिए इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है।

उज्जैन के बारे में कुछ कहावतें भी प्रचलित हैं जिनके अनुसार इस मंदिर में किसी भी देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्य का मुख्यमंत्री इस मंदिर परिसर में रात्री विश्राम नहीं करते हैं क्यूंकि जिसने भी यहाँ रात्री विश्राम किया उसे सत्ता से हाथ धोने पड़े। उमा भारती और बाबू लाल गोड़ इसका उदाहरण हैं। लोगों का मानना है कि उज्जैन के सिर्फ एक ही राजा हैं और वह यहाँ के महाकाल भगवान शिव जी हैं। 

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फोटो - महाकालेश्वर मंदिर



सोमनाथ मंदिर का इतिहास 

 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास के घूमने वाले स्थान (Visiting Places)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के आस पास की कुछ प्रमुख जगहों के बारे में नीचे जानकारी दी गयी है। आप यहाँ जाकर घूम सकते हैं।

1- देवास

देवास मध्य प्रदेश राज्य का बहुत प्राचीन शहर है। जिसमें कई लोकप्रिय मंदिर और ऐतिहासिक स्मारक हैं। इतिहास के शौकीनों और हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए उज्जैन के पास घूमने के लिए यह सबसे अच्छी जगहों में से एक है। देवास में खेनी वन्यजीव अभयारण्य को राजसी वनस्पतियों और जीवों के साथ घनिष्ठ संबंध के लिए जाना जाता है। जो हर प्रकृति से प्रेम करने वालों के सबसे सुंदर जगहों में से एक है। इस मंदिर से देवास की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है।

2- काल भैरव मंदिर

भगवान भैरव को शिव का ही एक उग्र रूप माना जाता हैऔर आठ भैरवों में काल भैरव सबसे महत्वपूर्ण है। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार काल भैरव मंदिर का संबंध तंत्र विद्या से होता हैजिसका अनुसरण एक गुप्त धार्मिक संप्रदाय करता हैजो काले जादू पर आधारित होता है। इस मंदिर में एक शिवलिंग विराजमान है जो महाशिवरात्रि के दौरान इस धार्मिक स्थल पर हजारों आगंतुकों को आकर्षित करता है। इस मंदिर से काल भैरव मंदिर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है।

3- राम मंदिर घाट

राम मंदिर घाट का हिंदुओं का एक बहुत बड़ा धार्मिक केंद्र हैक्योंकि यह उन चार स्थानों में से एक है जहां हर 12 साल में कुंभ मेला लगता है। इस घाट को कुंभ समारोह के संबंध में सबसे पुराने स्नान घाटों में से एक माना जाता है। कुंभ उत्सव के दौरान यहाँ लाखों लोग स्नान करने के लिए आते हैं ऐसी मान्यता है कि यहां एक डुबकी लगाने से आपके सभी पाप धूल जाते हैं। इस घाट से सूर्यास्त देखना सबसे आकर्षक दृश्यों में से एक है। मंदिर से इस घाट की दूरी लगभग 1 किलोमीटर है।

4- इस्कॉन उज्जैन

उज्जैन में इस्कॉन सफेद संगमरमर से बनी एक सुंदर इमारत है। यहाँ राधा मदन मोहनश्रीकृष्ण-बलराम और श्री गौरी निताई की तराशी गई संगमरमर की मूर्तियाँ विराजमान है। जो चमकीले रंग के कपड़े और सुंदर आभूषण पहने हुए हैंजो निश्चित रूप से आपका उत्साह बढ़ा देंगे, और आपको यहाँ कुछ समय बिताकर बहुत सुकून मिलेगा। इस मंदिर से इस्कॉन की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है।

5- कालियादेह पैलेस

यह पैलेस शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। इसका निर्माण सन 1458 ईस्वी में हुआ था। यह महल दोनों तरफ नदियों के पानी से घिरा हुआ है। माना जाता है कि एक बार सम्राट अकबर और जहांगीर ने इस भव्य स्मारक का दौरा किया था। पिंडारियों के शासनकाल के दौरान इस महल को तोड़ा गया थालेकिन माधवराव सिंधिया ने इस स्मारक की आंतरिक सुंदरता को देखा और इसे बहाल करने का फैसला किया। मंदिर से इस पैलेस की दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। 

 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में कैसे पहुँचें (How to reach)

हवाई मार्ग से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में पहुँचने के लिए आपको  इन्दोर एयर पोर्ट जाना पड़ेगा,वहाँ से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी लगभग 58 किलोमीटर है। वहाँ से आप टैक्सी के माध्यम से मंदिर में पहुँच सकते हैं।

अगर आप ट्रेन माध्यम से उज्जैन जाना चाहते हैं तो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के नजदीक में ही उज्जैन जंकसन है वहाँ से मंदिर की दूरी मात्र 1.5 किलोमीटर है

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सबसे नजदीकी बस स्टेशन मालीपुरा बस स्टेशन है यहाँ से स्टेशन की दूरी मात्र 9 किलोमीटर है।

Mahakaleshwar Temple Rod Map
फोटो - महाकालेश्वर मंदिर

 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के निकटतम होटल (Nearest Hotel)

यह सभी होटल महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन से तीन किलोमीटर की दूरी के अंदर हैं। जहां आप अपनी सुविधानुसार रुक सकते हो।

1-Hotel Amar Palace.

2-Hotel Shreenath Palace.

3-Hotel Hori Palace.

4-Hotel Rameshwaram.

5-Hotel Shiv Sagar.

6-Rudraksh Club & Resort.

7-Hotel Imperial Grand.

8-Hotel Bhagwati Park.

9-Hotel Shrimmaya.

10-Hotel Raghumani Palace.


Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैंआप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

Note

अगर आपके पास महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैंया आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं। 

 

   

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