Mallikarjuna Jyotirlinga in hindi, मल्लिकार्जुन मंदिर, 2021

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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का मेरे इस लेख में जिसमें मैं आज आपको मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में बताऊंगा। यह ज्योतिर्लिंग दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में कृष्णा नदी के तट पर श्री शैल पर्वत नामक स्थान पर स्थित है। इस पर्वत को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से दूसरा ज्योतिर्लिंग है। इस पवित्र स्थान का वर्णन महाभारतपद्म पुराण,और शिव पुराण आदि ग्रन्थों में भी किया गया है। यह ज्योतिर्लिंग सभी ज्योतिर्लिंगों में सबसे अलग हैक्यूंकि इस ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव के साथ माता पार्वती भी विराजमान हैं। मल्लिकार्जुन दो शब्द दो शब्दों (मल्लिका और अर्जुन) से मिलकर बना हुआ है। मल्लिका का अर्थ माता पार्वती और अर्जुन का अर्थ भगवान शिव है। यह ज्योतिर्लिंग शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है। यह 52 शक्ति पीठों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती के होंठ का ऊपरी हिस्सा गिरा था। शक्ति पीठ और ज्योतिर्लिंग एक ही स्थान पर होने के कारण यह स्थान हिंदुओं के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण स्थान है।

 

विषय सूची

1-  मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का धार्मिक इतिहास।

2-  मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास।

3-  मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की वास्तुकला।

4-  मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के खुलने का समय।

5-  मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के पास के दर्शनीय स्थल।

6-  मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कैसे पहुँचे ?

 

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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का धार्मिक इतिहास Religious History of Mallikarjuna Jyotirlinga

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में पौराणिक कथाओं में बताया गया हैकि एक बार माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय और श्री गणेश अपने विवाह को लेकर दोनों आपस में लड़ रहे थे कि मैं पहले शादी करूंगा तो इस लड़ाई के समाधान के लिए दोनों भाई अपने माता पार्वती और पिता भगवान शिव के पास गये। दोनों भाइयों ने विस्तार से अपनी बात उनको सुनाई। भाइयों के बीच शादी को लेकर चल रहे झगड़े को देख कर माता पार्वती और शंकर जी ने कहा- इस बात का समाधान एक ही प्रकार से हो सकता हैअगर तुम दोनों में से जो भी पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाकर सबसे पहले यहाँ आएगा उसी का विवाह पहले किया जाएगा। यह सुनकर स्वामी कार्तिकेय बहुत खुश हुये और अपने वाहन मयूर पर सवार हो कर पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाने निकल पड़े। लेकिन श्री गणेश बहुत दुखी हो गये कि मेरा वाहन तो मुशक है ओ भला मोर का पीछा कैसे कर सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होने मन ही मन अपने माता पिता का ध्यान लगाया और कुछ ही समय में उन्होने एक आसान सा उपाय खोज निकाला।

श्री गणेश उस स्थान से खड़े होकर सीधे माता पार्वती और पिता भगवान शिव के पास चले गये और माता पार्वती और पिता शिव के हाथों को पकड़ा और दोनों को एक ऊंचे स्थान पर बैठाया। उसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ दोनों के चरणों को स्पर्श किया साथ ही पुष्पों द्वारा उनकी पुजा की। पुजा करने के बाद माता पिता की परिक्रमा करने लगे। जब एक चक्कर पूरा हो गया तो माता पिता के चरण स्पर्श कर फिर दूसरा चक्कर लगाया और ऐसा करते-करते पूरे सात बार विधिवत पूजन किया। यह सब देख माता पार्वती ने पूछा कि- पुत्र तुम ये परिक्रमाएँ क्यू कर रहे हो ? तब गणपती जी ने कहा कि- शास्त्रों में लिखा है जो पुण्य सारी दुनियाँ कि परिक्रमा करने से प्राप्त होता है वही पुण्य माता कि परिक्रमा करने से मिल जाता है और पिता का पूजन करने से सभी देवताओं का पूजन हो जाता है क्यूकि पिता देव तुल्य होते हैं। अतः मैंने आप दोनों कि परिक्रमा करके पूरे ब्रह्मांड कि परिक्रमा कर ली। यह सुनकर माता पार्वती और पिता शिव गणेश जी चतुराई देखकर बहुत खुश हुये और गणेश जी का विवाह विश्वरूप प्रजापति की दो बेटियों रिद्धि और सिद्धि के साथ करा दिया।

जब स्वामी कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे थे। तब देवर्षि नारद कार्तिकेय से मिले और उन्होंने श्री गणेश जी के विवाह के बारे में कार्तिकेय को बता दिया। जब कार्तिकेय वापस लौटे तो देखा श्री गणेश का विवाह हो गया था और गणेश जी को दो पुत्रों कि प्राप्ति भी हो गयी थी। यह सब देख कार्तिकेय बहुत दुखी हुये और माता- पिता के चरण स्पर्श कर वहाँ से वो क्रोंच पर्वत की ओर चले गये और उसी पर्वत पर निवास करने लगे। बाद में माता पार्वती जी अपने पुत्र कार्तिकेय को वापस लाने के लिए देवर्षि नारद को भेजापरंतु कार्तिकेय ने उनकी बात नहीं मानी और देवर्षि नारद को खाली हाथ वापस भेज दिया। अपने पुत्र को रूठा देख कर माता पार्वती भगवान शिव को अपने साथ ले कर कार्तिकेय को मनाने के लिए क्रोंच पर्वत की ओर जाने लगे। जब यह खबर कार्तिकेय को पता चली कि माता-पिता उसे मनाने के लिए यहाँ आ रहे हैं तो वह उस पर्वत से तीन योजन (छत्तीस किलोमीटर) दूर चले गये। जब माता पार्वती और पिता शिव ज्योति के रूप में क्रोंच पर्वत पहुँचे और अपने पुत्र कार्तिकेय को वहाँ नहीं देखा तो वह बहुत दुखी हुये। अपने पुत्र मोह के कारण दोनों बारी-बारी अमावस्या को भगवान शिव और पुर्णिमा को माता पार्वती उस पर्वत पर जाने लगे। उसी दिन से यह स्थान मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध हो गया। 

मल्लिकार्जुन मंदिर, Mallikarjuna Temple,




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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास History of Mallikarjuna Jyotirlinga

प्रारंभ में कई शासकों ने मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के निर्माण कार्य और रखरखाव में अपना योगदान दिया। परंतु बाद में इक्ष्वाकु वंश के पल्लवचालुक्य और रेड्डी लोग जो मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के अनुयायी थे उन्होने इस मंदिर का रख-रखाव किया था। बाद में 16 वीं शताब्दी के आस पास विजयनगर साम्राज्य के महाराजा कृष्ण देव राय मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आए। तब उन्होने यहाँ एक आकर्षक मंडप का निर्माण कराया थाइस मंडप के ऊपरी शिखर को सोने से बनवाया था। उनके दर्शन के डेढ़ सौ वर्ष बाद छत्रपति शिवाजी महाराज भी क्रोंच पर्वत पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आए। उन्होने मंदिर से कुछ दूर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशाला का निर्माण करवाया। मुगल शासन काल के दौरान इस मंदिर में पूजा पाठ पर रोक लगा दी गयी थीलेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान यहाँ पर पूजा पाठ फिर से शुरू की गई। आजादी के बाद ही यह मंदिर अपनी प्रमुखता में वापस आ गया। 

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फोटो - मल्लिकार्जुन मंदिर


मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की वास्तुकला Architecture of Mallikarjuna Jyotirlinga

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग परिसर लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर में चार गेट बनाए गए हैंजिन्हें गोपुरम कहा जाता है। मंदिर परिसर के अंदर  कई छोटे-छोटे मंदिर हैंजिनमें मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और भ्रामराम्बा सबसे प्रमुख हैं। मंदिर परिसर के अंदर कई प्राचीन हॉल बने हुए हैं। इस मंदिर में सबसे उल्लेखनीय मंडप मुख मंडप है, जिसे विजयनगर शासन काल के दौरान बनाया गया था। जो मंदिर की पूर्व दिशा की ओर स्थित है। मुख्य मंडप के चारों ओर कई स्तंभ हुए हैं। मंदिर के गर्भ गृह में नादिकेश्वर की एक विशाल मूर्ति और एक ज्योतिर्लिंग विराजमान है। यह मंदिर चारों ओर से ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है। गर्भगृह की ओर जाने वाले हॉल को बहुत ही शानदार ढंग से बनाए गये खंभे स्थित किया गया है। मंदिर में जिस स्थान पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग विराजमान हैउसे इस मंदिर का सबसे प्राचीन स्थान माना जाता है। जिसे 7 वीं शताब्दी में बनाया गया था।  

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फोटो - मल्लिकार्जुन मंदिर

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के खुलने का समय mallikarjuna jyotirlinga opning timing

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का खुलने और बंद होने का समय के बारे में नीचे बताया गया है।

मंदिर खुलने का समय सुबह 4:30 बजे।

सुबह के समय दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक।

शाम को दर्शन का समय शाम 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक।

सुप्रभात दर्शन का समय सुबह 5:00 बजे।

महामंगला आरती सुबह को 5:30 बजे।

महामंगला आरती शाम शाम 5:00 बजे।

मंदिर बंद होने का समय रात्री 10:00 बजे।

 

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के पास के दर्शनीय स्थल mallikarjuna jyotirlinga near visiting places

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के आस पास की प्रमुख जगहों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है। अगर आपके पास घूमने का समय है तो आप भी यहाँ घूमने के लिए जा सकते हैं।

1- श्रीशैलम जलाशय

अगर आप वाटर फॉल देखने के शौकीन हो तो यह जगह आपके लिए बहुत अच्छी है। श्रीशैलम जलाशय आंध्र प्रदेश राज्य में कृष्णा नदी पर बना हुआ है। यह देश में दूसरा सबसे बड़ा क्षमता वाला जल विद्युत स्टेशन है। यह कुरनूल और महबूबनगर जिलों के बीच नल्लामाला पहाड़ियों में समुद्र तल से 300 मीटर ऊपर एक गहरी खाई में स्थित है। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग इस जलाशय की दूरी लगभग 14 किलोमीटर है।

2- श्रीशैलम टाइगर रिजर्व

अगर आपको जानवरों को देखना पसंद है तो आपको जरूर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व में जाना चाहिए। यह टाइगर रिजर्व 3568 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। जो इसे भारत के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में से एक बनाता है। यहाँ आपको बाघ के अलावा तेंदुएसुस्त भालूढोलभारतीय पैंगोलिनचीतलसांभर हिरणशेवरोटेनब्लैकबकचिंकारा और चौसिंघा आदि प्रकार के जानवर देखने को मिलते हैं। इस क्षेत्र में मगरमच्छभारतीय अजगरकिंग कोबरा और भारतीय मोर सहित अन्य सरीसृप और उभयचर भी पाए जाते हैं। यह टाइगर रिजर्व मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

 3- पत्थला गंगा

अगर आप रोपवे कार की सवारी का आनंद लेना चाहते हो तो आपको एक बार यहाँ जरूर जाना चाहिए। आप ऊपर पहाड़ से ही आस-पास के दृश्यों का आनंद भी लें सकते हो। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से इस रोपवे की दूरी लगभग 3 किलोमीटर है।

4- अक्कमहादेवी गुफाएं

यह गुफाएँ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के आस पास के हिस्सों में फैली हुई हैं। इन गुफाओं के इतिहास के बारे में बताया जाता है। कि यह 1000 साल से भी ज्यादा पुरानी गुफाएँ है। यह गुफाएँ कृष्णा नदी के ठीक सामने वाली पहाड़ियों में स्थित हैं। ये गुफाएं दर्शकों की आंखों पर एक अलग ही आकर्षक छवि पेश करती हैं।

5- मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर

यह मंदिर कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित इस शहर का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर 600 साल पुराना मंदिर है। इस मंदिर को विजयनगर के राजा हरिहर राय ने बनवाया था। पौराणिक कथा के अनुसार मंदिर में देवी पार्वती ने ऋषि ब्रिंगी को खड़े होने का श्राप दिया थाक्योंकि उन्होंने केवल भगवान शिव की पूजा की थी। भगवान शिव ने देवी को सांत्वना देने के बाद उन्हें एक तीसरा पैर दियाताकि वह अधिक आराम से खड़े हो सकें। यहां तीन पैरों पर खड़े ब्रिंगी ऋषि की मूर्ति के साथ-साथ नंदीसहस्रलिंग और नटराज की मूर्तियां भी विराजमान है।

 

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कैसे पहुँचे How to reach Mallikarjuna Jyotirlinga ?

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग श्री शैलम में आप हवाई जहाजट्रेन और बस तीनों माध्यमों से पहुँच सकते हो।

हवाई मार्ग से श्री शैलम जिले का निकटतम हवाई अड्डा राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। हवाई अड्डा और श्री शैलम के बीच की दूरी 44 किमी है। हवाई अड्डा से आप टेक्सी  के माध्यम से मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग पहुँच सकते हो।

रेल मार्ग से शैलम जिले के निकटतम रेलवे स्टेशन का नाम मार्कापुर रेलवे स्टेशन है। मार्कापुर रेलवे स्टेशन से श्री सैलम की दूरी लगभग 85 किमी है।

सड़क मार्ग से श्रीसैलम पहुँचने का कुशल मार्ग सुव्यवस्थित सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से है। आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें और कुछ निजी बसों से आप यहाँ पहुँच सकते है। 


Mallikarjuna Temple Road Map
रोड मैप फोटो - मल्लिकार्जुन मंदिर

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के पास के होटल Hotels near Mallikarjuna Jyotirlinga

श्रीशैलम में ये सभी होटल मल्लिकार्जुन मंदिर के आस-पास स्थित हैं। आप अपनी सुविधानुसार किसी भी होटल में रुक सकते हैं।

1-Hotel Shobha.

2-Tejaswi Hotelv.

3-Mallikarjuna Sadan.

4-Pathaleswara Sadan.

5-Ganga & Gouri Sadan.

6-APTDC Srisailam.

7-Gowri Sankar Lodge.

8-Haritha Vijay Vihar Hotel.

9-Hotel Dr Indraaprasthaa.

10-Hotel Suraj Grand.

  

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैंआप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

 

Note

अगर आपके पास मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैंया आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं। 

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