Somnath Temple History in hindi, सोमनाथ मंदिर, 2021

 

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सोमनाथ मंदिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तो आप सभी का स्वागत है मेरे इस लेख में जिसमें मैं आज आपको भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के बारे में बताऊंगा। यह मंदिर सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में अरब सागर के किनारे पर स्थित है। पहले यह जानते हैं कि ज्योतिर्लिंग किसे कहते हैं, वह स्थान जहां पर भगवान शिव एक दिव्य रूप में प्रकट होकर ज्योति स्तंभ में परिलीन हो गए उसे ज्योतिर्लिंग कहते हैं। सोमनाथ ही पहला ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव दिव्य रूप में प्रकट हुये थे। यह तीर्थ स्थान देश के प्राचीनतम तीर्थ स्थानों में से एक हैइसका उल्लेख स्कन्द पुराणश्रीमद भगवत गीता और शिव पुराण आदि ग्रंथो में किया गया है और ऋग्वेद में भी सोमेश्वर महादेव की महिमा का वर्णन किया गया है।

 

विषय सूची

1-  सोमनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व।

2-  सोमनाथ मंदिर का इतिहास।

3-  सोमनाथ मंदिर की वास्तुकला।

4-  सोमनाथ मंदिर खुलने का समय।

5-  सोमनाथ मंदिर के आस पास घूमने की जगहें।

6-  सोमनाथ मंदिर में कैसे पहुंचे ?

 

सोमनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व Religious Significance of Somnath Temple

सोमनाथ मंदिर के बारे में  वेदों और धार्मिक कथाओं में बताया गया है कि राजा दक्ष प्रजापति की 27 कन्याएँ थी। उन सभी का विवाह चंद्रमा जी के साथ हुआ था। भगवान चंद्र देव उन सभी बहनों में से रोहणी को सर्वाधिक प्रेम करते थे। चंद्र देव के इस व्यवहार से दक्ष प्रजापति की अन्य कन्याएँ बहुत परेशान रहती थी। उन सभी बहनों ने अपनी व्यथा दक्ष प्रजापति की सुनाई, और चंद्र देव के इस प्रकार के व्यवहार के लिए दक्ष प्रजापति अनेक बार उनको समझाया परन्तु रोहणी के प्रेम के वशीभूत चंद्र देव के ह्रदय पर उनकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इन सब बातों से परेशान हो कर दक्ष प्रजापति ने क्रोध में आकर चंद्र देव को क्षय रोग से ग्रस्त होने का श्राप दे दिया। इस श्राप के कारण चंद्र देव क्षय ग्रस्त हो गए जिसके कारण प्रथ्वी पर सुधा शीतलता का सम्पूर्ण कार्य रुक गया और चारों दिशाओं में सभी लोग परेशान हो गए थे। यह सब देख कर चंद्र देव भी बहुत दुखी हो गए और उनकी प्रार्थना सुनकर देवता और ऋषि गण उनके उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गए और उन्हे सम्पूर्ण बात बताई। उनकी बात सुनकर ब्रम्हा जी ने कहा-चंद्रमा अपने श्राप विमोचन के लिए अन्य देवताओं के साथ पवित्र प्रभास क्षेत्र में जाकर महा म्रत्युंजय भगवान शिव की आराधना करें उनकी कृपा से अवश्य ही उनका श्राप नष्ट हो जाएगा और वे क्षय रोग से मुक्त हो जाएंगे।

पुराणों के अनुसार चंद्र देव ने घोर तपस्या करते हुये 10 करोड़ बार महा म्रत्युंजय मंत्र का जाप किया। इस से प्रसन्न हो कर भगवान शिव ने उन्हे अमरत्व का वरदान दिया और भगवान शिव ने चंद्र देव से कहा- चंद्र देव तुम दुखी न हो मेरे वरदान से तुम्हारा श्राप मोचन तो होगा ही और साथ ही प्रजापति दक्ष के वचनों की भी रक्षा होगी। भगवान शिव बोले कि कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन तुम्हारी एक-एक कला खत्म होगी परन्तु शुक्ल पक्ष में उसी क्रम तुम्हारी एक-एक कला बढ़ती जाएगी और प्रत्येक पुर्णिमा को तुम्हें पूरा आकार प्राप्त हो जाएगा। चंद्र देव वरदान मिलने के बाद पुनः दसों-दिशाओं में सुधा वर्षन का कार्य करने लगे। श्राप मुक्त होकर चंद्रमा जी ने अन्य देवताओं के साथ मिलकर भगवान शिव से प्रार्थना की आप माता पार्वती के साथ प्राणियों के उद्धार करने के लिए इसी स्थान पर निवास करें। भगवान शिव जी ने चंद्र देव की बात मानकर ज्योतिर्लिंग के रूप में माता पार्वती के साथ इसी स्थान पर निवास करने लगे। चंद्रमा का एक नाम सोम भी है उन्होने भगवान शिव को ही अपना नाथ मानकर यहाँ तपस्या की थी। इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग को सोमनाथ मंदिर भी कहा जाता है। 

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सोमनाथ मंदिर का इतिहास somnath temple history

सोमनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि सर्वप्रथम इस मंदिर का निर्माण भगवान सोम देव (चंद्र देव) ने करवाया था। उस समय यह मंदिर सोने का बना हुआ था। बाद में जब द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण गुजरात में जा कर बस गए, तो उन्होने इस मंदिर का निर्माण लकड़ियों से करवाया था। लेकिन समय के साथ यह मंदिर भी पुराना होता गया। बाद में 7 वीं सदी में इस मंदिर का पुनर्निर्माण वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने करवाया था। मुगल शासन काल के दौरान सिंध के अरब गवर्नर अल-जुनैद ने इस मंदिर को बहुत क्षति पहुंचाई थी। लेकिन सन 1024 में महमूद गजनवी ने अपने 5000 साथियों के साथ मिलकर सोमनाथ मंदिर को तहस-नहस कर दिया था। इस हमले में गजनवी ने 25000 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया और अपने साथ मंदिर से सोनाचाँदीहीरेजवाहरात लूट कर अपने देश वापस चला गया। गजनवी के मंदिर लूटने के बाद राजा भीमदेव इस मंदिर की फिर से प्राण प्रतिष्ठा की थी।

बाद में अलाउद्दीन खिलजी ने सन 1297 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर को पुनः ध्वस्त कर दिया और उसके सेनापति नुसरत खाँ ने इस मंदिर को पुनः लूट लिया। फिर बाद में 1815 ईस्वी में प्रतिहार राजा नाग भट्ट द्वितीय ने इस मंदिर का निर्माण तीसरी बार करवाया था। जहां एक ओर हिन्दू शासक मंदिर का बार-बार जीर्णोद्धार कराते तो वही मुस्लिम शासक बार-बार मंदिर को लूट ले जाते थे। मुस्लिम शासकों ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण किया था। 

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सोमनाथ मंदिर की वास्तुकला Architecture of Somnath Temple

सोमनाथ मंदिर का निर्माण चालुक्य शैली के अनुसार किया गया है। इस मंदिर के निर्माण में गुजरात के राजमिस्त्री सोमपुरा सलात के कार्य की झलक दिखती है। मंदिर के ऊपर जो शिखर बना है उसकी ऊंचाई 15 मीटर है। मंदिर को गर्भ गृह, सभा मंडप और नित्य मंडप तीन भागों में बंटा हुआ है। इस मंदिर की ऊंचाई 150 फुट है। मंदिर के चोटी पर स्थित कलश का वजन 10 टन हैऔर मंदिर के ऊपर विराजमान  ध्वजा 27 फुट ऊंची है।  

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सोमनाथ मंदिर खुलने का समय Somnath Temple Opening Time

सोमनाथ मंदिर का खुलने का समय सुबह 6:00 बजे है।

यहाँ दिन तीन बार आरती होती है सुबह 7:00 बजेदोपहर 12:00 बजे और शाम को 7:00 बजे।

मंदिर में होने वाले दैनिक ध्वनि और प्रकाश शो का समय रात 8:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है।

मंदिर में दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से रात 9:30 बजे तक होता है।

मंदिर में लाइव दर्शन का समय सुबह 7:00 बजे से रात 8:00 बजे तक होता है।

मंदिर में ड्रेस कोड कोई भी अच्छा पहनावा अभिषेक के दौरान पुरुषों को शर्ट और बनियान उतारनी चाहिए।

 

सोमनाथ मंदिर के आस पास घूमने की जगहें somnath temple near places

सोमनाथ मंदिर  के आस पास घूमने वाली कुछ प्रमुख जगहों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है।

1- वेनेश्वर महादेव मंदिर 

सोमनाथ में वेनेश्वर महादेव मंदिर सोमनाथ में घूमने के लिए सबसे दिलचस्प स्थानों में से एक है। जो सोमनाथ ट्रस्ट धर्मशाला गेट के सामने स्थित है। असामान्य शिखर वाला यह पूर्वमुखी मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर सोमनाथ मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

2- सोमनाथ बीच 

सोमनाथ बीच अपनी खूबसूरती से जगमगाती लहरों और ग्रे रेत के लंबे खंडों के लिए प्रसिद्ध है। आप दिन भर के दर्शनीय स्थलों की यात्रा के बाद यहां आराम कर सकते हो, हालांकि यहाँ पर तैराकी करने की आज्ञा नहीं दी जाती है। सूर्यास्त के समय यहाँ पर देखने के लिए बहुत सुंदर दृश्य होता हैं। यह बीच मंदिर से 1 किलोमीटर की दूरी पर है।

3- प्रभास पाटन संग्रहालय 

यह पुरातत्व संग्रहालय सोमनाथ में सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है। इस संग्रहालय को सन 1921 ईस्वी में स्थापित किया गया था, और इसमें लगभग 3500 से भी अधिक वस्तुओं का एक अद्भुत स्मरण संग्रह बनाया गया है। जिसमें प्राचीन मंदिरों की मूर्तियां,नक्काशीदार पत्थरशिलालेख और भगवान की 11 वीं शताब्दी की मूर्तियों को रखा गया हैं, और इस संग्रहालय अग्निउमा महेश्वरभगवान विष्णुपार्वती और नाट्य भैरव आदि देवताओं की मूर्तियाँ भी रखी गई हैं। यह संग्रहालय मंदिर से लगभग 350 मीटर की दूरी पर स्थित है। 


सोमनाथ मंदिर में कैसे पहुंचे How to reach Somnath Temple ?

हवाई मार्ग से सोमनाथ मंदिर में पहुँचने के लिये दीव हवाई अड्डे से ऑटो टैक्सी या टैक्सी के माध्यम से पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से सोमनाथ मंदिर में पहुँचने के लिये सोमनाथ रेलवे स्टेशन से ऑटो टैक्सी या पैदल ही मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 3 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से सोमनाथ मंदिर में पहुँचने के लिये गुजरात राज्य के किसी भी शहर से परिवहन निगम की बसों,निजी बसों और टैक्सियों के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं।

Somnath  Temple Road Map


 

सोमनाथ मंदिर के पास के होटल Hotels near Somnath Temple

यह होटल सोमनाथ मंदिर से 3 किलोमीटर की दूरी के अंदर स्थित है।

1- The Fern Residency Somnath

2- The Square Somnath

3- Hotel Bansidhar-Somnath

4- The Bliss Hotel

5- The Somnath Gateway

6- Hotel Majestic Somnath

7- Hotel Somnath Sagar

8- SHREE HOTEL SHIVDHARA

9- Bhalkeshwar Villa & Resort

10-HOTEL DAMODAR

 

FAQ

Q- सोमनाथ मंदिर किस राज्य में है ?

A- सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य में स्थित है।

Q- सोमनाथ मंदिर किसने बनवाया था ?

A- सोमनाथ मंदिर का निर्माण सर्वप्रथम चंद्र देव किया था। लेकिन वर्तमान मंदिर का निर्माण प्रतिहार राजा नाग भट्ट द्वितीय ने करवाया था।

Q- सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कब हुआ ?

A- सोमनाथ मंदिर पर सन 1025 ईस्वी में आक्रमण हुआ था।

Q- सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किसने किया ?

A- सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी ने आक्रमण किया था।

Q- सोमनाथ मंदिर को किसने लूटा था ?

A- सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनवी ने लूटा था।

Q- गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर गजनी के किस सुल्तान ने आक्रमण किया ?

A- सोमनाथ मंदिर पर गजनी के सुल्तान महमूद गजनवी ने आक्रमण किया था।

Q- सोमनाथ मंदिर किस जिले में स्थित है ?

A- सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले में स्थित है।

 

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको सोमनाथ मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैंआप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

 Note

अगर आपके पास सोमनाथ मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैंया आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं। 


 



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