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Grishneshwar Temple History In Hindi, घृष्णेश्वर मन्दिर, 2021

 

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घृष्णेश्वर मन्दिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का मेरे एक और लेख में जिसमें मैं आज आपको घृष्णेश्वर मन्दिर के बारे में बताऊंगा। यह मंदिर महाराष्ट्र में औरंगाबाद शहर के पास वेरुल नामक स्थान पर स्थित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से अंतिम ज्योतिर्लिंग है। यह मंदिर अजंता और ऐलोरा की गुफाओं के पास ही स्थित है। प्राचीन हिन्दू धर्मों में घृष्णेश्वर मन्दिर को कुम कुमेश्वरघुश्मेश्वर या घुसृणेश्वर मंदिर आदि नामों से भी जाना जाता था।

 

विषय सूची

1-  घृष्णेश्वर मन्दिर का धार्मिक महत्व।

2-  घृष्णेश्वर मन्दिर का इतिहास।

3-  घृष्णेश्वर मन्दिर की वास्तुकला।

4-  घृष्णेश्वर मंदिर खुलने का समय।

5-  घृष्णेश्वर मंदिर के पास घूमने के स्थान।

6-  घृष्णेश्वर मन्दिर में कैसे पहुंचे ?

 

घृष्णेश्वर मन्दिर का धार्मिक महत्व (Religious Significance)

घृष्णेश्वर मन्दिर के बारे में शिव पुराण बताया गया है कि देवगिरि पर्वत के पास सुधर्मा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेहा के साथ रहता था। वह ब्राह्मण बहुत बड़ा शिव भक्त था। प्रत्येक दिन सुबह उठते ही विधि विधान से भगवान शिव की पुजा आराधना किया करते थे। दोनों ब्राह्मण पति-पत्नी खुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। परंतु उन दोनों ब्राह्मण पति-पत्नी को हमेशा इस बात का दुख रहता थाकि उनकी कोई संतान नहीं है। एक बार सुदेहा पड़ोसियों के व्यंगों से परेशान होकर सुधर्मा से बोली कि मुझे संतान चाहिये, आपको हमारे वंश को नष्ट होने से बचाना होगा और वंश को आगे बढ़ाने के लिए आप मेरी बहन घुष्मा से विवाह कर लीजिए। यह बात सुनकर सुधर्मा ने इस बात का विरोध किया। उन्होने कहा कि इस विवाह से सबसे ज्यादा दुख तुमको ही होने वाला है। परन्तु सुदेहा अपनी जिद पर अड़ी रही। तो सुधर्मा ने अपनी पत्नी की बात मानकर उसकी बहन घुष्मा से विवाह कर लिया।

शादी होने के बाद सुदेहा ने अपनी बहन घुष्मा से कहा कि प्रतिदिन 101 पार्थिव शिव लिंग बनाकर पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पुजा करते रहना है। वह बहन की बात मानकर प्रतिदिन पूजा करती थी और पुजा करने के बाद उन शिव लिंगों का विशर्जन पास में स्थित तालाब में किया करती थी। कुछ समय पश्चात भगवान शिव कि कृपा से घुष्मा को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसके बाद घुष्मा का सम्मान बढ़ता गया और सुदेहा के मन में छोटी बहन से इर्ष्या होने लगी। पुत्र के बड़े होने के बाद बड़े धूम-धाम से उसकी शादी की गई जिसके बाद घुष्मा का सम्मान और बढ़ गया। यह बात देखकर सुदेहा की इर्ष्या और अधिक बढ़ गयी। जिस कारण उसने सोते हुये पुत्र की चाकू से हत्या कर दी और उसके अंगों को काटकर उसी तालाब में फैक दिया जहां घुष्मा शिव लिंगों का विशर्जन करती थी। अगले दिन सुबह जब घुष्मा और सुधर्मा भगवान शिव की पुजा में लीन थे तो उनको पुत्रवधू के रोने कि आवाज आयी साथ में सुदेहा भी रोने का नाटक करने लगी। पुजा समाप्त होने के बाद घुष्मा जब शिव लिंगों का विसर्जन करने उसी तालाब में गयी तो उसने देखा कि उसका पुत्र वही तालाब के पास खड़ा है।

यह देख कर घुष्मा बहुत खुश हुई और उसे भगवान शिव कि लीला समझ में आ गयी। उसी समय भगवान शिव वहाँ पर एक ज्योति के रूप में प्रकट हुये। उन्होने घुष्मा को उसकी बहन सुदेहा का अपराध बताया और उसे दंड देने की बात कही। यह बात सुनकर घुष्मा ने भगवान शिव से अपनी बहन को माफ करने अनुरोध किया घुष्मा की बातों से पसन्न होकर भगवान शिव ने उससे वर मांगने को कहा तो घुष्मा ने भगवान शिव से वर मांगा कि अपने भक्तों के कल्याण के लिए आप हमेशा के लिए यहाँ विराजमान हो जाएँ। उसी दिन से यह मंदिर घृष्णेश्वर मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। 


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घृष्णेश्वर मन्दिर का इतिहास (History)

घृष्णेश्वर मन्दिर के विनाश और पुनः निर्माण का भी एक अलग ही इतिहास है। 13 वीं और 14 वीं शताब्दी के दौरान जब दिल्ली सल्तनत मुगल शासकों और मराठा शासकों के बीच युद्ध हुआ तो इस मंदिर को भी बहुत नुकसान हुआ। मुस्लिम शासकों ने मंदिर के प्राचीन स्वरूप तहस नहस कर दिया था। जहां हिन्दू शासक बार-बार इस मंदिर का निर्माण करते रहते तो मुस्लिम शासक इस मंदिर को तोड़ते रहते थे। बाद में 16 वीं शताब्दी में इस मंदिर जीर्णोद्धार मालोजीराजे भौंसले जी द्वारा कराया गया था। मालोजीराजे भौंसले छत्रपति शिवाजी महाराज के दादा जी थे। लेकिन इस मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण 18 वीं शताब्दी में इंदोर कि महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने करवाया था। 


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घृष्णेश्वर मन्दिर की वास्तुकला (Architecture)

घृष्णेश्वर मन्दिर प्राचीन हिन्दू शिल्प कला का एक बेजोड़ नमूना है। इस मंदिर का निर्माण लाल बलुवा पत्थर से किया गया है। इस मंदिर परिसर में तीन प्रवेश द्वार हैं। जिनमें एक महाद्वार और दो पक्ष द्वार हैं। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग विराजमान है। गर्भ गृह के ठीक सामने एक बहुत ही भव्य और शानदार सभा गृह स्थित है। इस सभा गृह का निर्माण मजबूत स्तम्भों में किया है। इस सभा कक्ष में नंदी जी की एक विशाल मूर्ति विराजमान है। जो भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के ठीक सामने स्थित है।

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यह भी पढ़ें नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास 

 

घृष्णेश्वर मंदिर खुलने का समय (Opening Timings)

घृष्णेश्वर मन्दिर सुबह 05:30 बजे से रात को 9:30 बजे तक खुला रहता है। श्रावण के महीने में मंदिर सुबह 03:00 बजे से रात 11:00 बजे के बीच खुला रहता है। इस दौरान मंदिर में कई तरह के अनुष्ठान भी किए जाते हैं। भक्त दोपहर की आरतीशाम की आरती आदि अनुष्ठानों में शामिल हो सकते हैं।

दर्शन का समय

दर्शन सुबह 5:30 बजे से रात को 9:30बजे तक।

श्रवण मास के दौरान दर्शन सुबह 3:00 बजे से दोपहर 11:00 बजे तक।

दोपहर पूजा दोपहर 1:00 बजे - दोपहर 1:30 बजे तक ।

सायंकाल पूजा 4:30 बजे से 5:00 बजे तक।

 

घृष्णेश्वर मंदिर के पास घूमने के स्थान (Visiting Places)

घृष्णेश्वर मंदिर के आस पास घूमने वाले कुछ प्रमुख जगहों के बारे में नीचे जानकारी दी गयी है। कुछ समय निकाल कर आप इन स्थानों में घूम सकते हैं।

1- दौलताबाद किला

यह किला महाराष्ट्र का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। इस किले का निर्माण त्रिकोणीय आकार में हुआ है। यह महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। इस किले के भीतर कई खूबसूरत स्मारक स्थित हैं जैसे चीनी महलचांद मीनार और हाथी टैंक आदि हैं। किले के शीर्ष में जाने का रास्ता एक संकरा पुल हैजिससे एक बार में केवल दो व्यक्ति ही जा सकते हैं। इस किले के बगल में एक चौड़ी खाई है और और वह हमेशा मगरमच्छों से भरा रहता है।

2- भद्रा मारुति मंदिर

भद्रा मारुति मंदिर औरंगाबाद के पास घूमने वाले सबसे प्रमुख स्थानों में से एक है। यह मंदिर भगवान हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी की मूर्ति यहां शयन अवस्था में विराजमान है और पूरी तरह से सिन्दूर से ढकी हुई है। अगर आप यहाँ आना चाहते हो तो हनुमान जयंती या राम नवमी के दौरान यहाँ आने का सबसे अच्छा समय है क्यूंकि इस समय यहाँ भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। जिस कारण इस जगह की सुंदरता और आध्यात्मिकता कई गुना बढ़ जाती है।

 3- एलोरा की गुफाएं

एलोरा में पत्थरों से निर्मित 34 गुफ़ाएं विराजमान हैं। यह गुफाएं तीन अलग-अलग धर्मों (बौद्ध धर्मजैन धर्म और हिंदू धर्म) के निर्माण को दर्शाती हैं। यहाँ पर बौद्ध धर्म की 12 गुफाएंहिंदू धर्म की 17 गुफाएं और जैन धर्म की 5 गुफाएं स्थित हैं। यह औरंगाबाद के पास घूमने के लिए उन स्थानों में से हैजो साल के लगभग 365 दिनों में एक ताजा और सुखद जलवायु का आभास कराती हैं। यहाँ पर बारिश का मौसम के मौसम में जाना पर्यटकों को बहुत पसंद आता है।

4- अजंता की गुफाएं

अजंता की गुफाएं औरंगाबाद के पास घूमने की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। इस गुफा की वास्तुकला बौद्ध धर्म कर प्रभाव को दर्शाती है और इन गुफाओं की संख्या लगभग 29 है। इस गुफा की दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

5- शनि शिंगणापुर

शनि शिंगणापुर एक उच्च आध्यात्मिकता वाले काले पत्थर पर भगवान शनि देव की पूजा की जाती है। जिस कारण यह स्थान को अपने आप में विशिष्ट स्थान है आपको यहां पर भगवान शनि देव का आशीर्वाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं है। आप कुछ ही मिनटों के भीतर यहाँ दर्शन कर सकते हो। स्थानीय लोग यहां हर शनिवार को पूजा और अभिषेक करते हैं। यह औरंगाबाद के पास घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है।

 

घृष्णेश्वर मन्दिर में कैसे पहुंचे (How to reach) ?

हवाई मार्ग से घृष्णेश्वर मन्दिर पहुँचने के लिए छत्रपति संभाजी महाराज एयरपोर्टऔरंगाबाद से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी 36.5 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से घृष्णेश्वर मन्दिर पहुँचने के लिए औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 29 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से घृष्णेश्वर मन्दिर पहुँचने के लिए महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों से महाराष्ट्र परिवहन की बसें और निजी बसें चलती रहती हैं। 

 

Grishneshwar Temple Road Map
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घृष्णेश्वर मंदिर के पास होटल (Near Hotels)

घृष्णेश्वर मन्दिर के पास स्थित होटलों के बारे में नीचे जानकारी दी गयी है। यह सभी होटल मंदिर के पास ही स्थित है। आप अपनी सुविधानुसार नीचे दिये गए किसी भी होटल में रुक सकते हैं-

1-Ellora Heritage Resort.

2-Pace Hotel.

3-Hiranya Resorts.

4-The Meadows Resort and Spa.

5-Vivanta Aurangabad.

6-Kailas Hotel.

7-Ellora heritage resort, Ellora.

8-Vrindavan Resort Ellora.

9-Hotel Ellora Crown.

10-Hotel Green Park.

 

Conclusion          

आशा करता हूँ कि मैंने जो घृष्णेश्वर मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट से काशी विश्वनाथ मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैंआप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

 Note

अगर आपके पास घृष्णेश्वर मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैंया आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं।


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