त्र्यंबकेश्वर मंदिर (Trimbakeshwer Temple History In Hindi)

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का मेरे ब्लॉग Mandir Diary जिसमें मैं आज आपको त्र्यंबकेश्वर मंदिर (Trimbakeshwer Temple History In Hindi) के बारे में बताऊंगा। यह मंदिर महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में त्र्यंबक नामक जगह और गोदावरी नदी के किनारे पर बसे ब्रह्मगिरी के पहाड़ियों पर स्थित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से आठवाँ ज्योतिर्लिंग है। यह मंदिर तीन पहाड़ियों ब्रह्मगिरी, नीलगिरि और कालागिरी के बीच स्थित है। जिस कारण इसे त्र्यंबकेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर में शिव, विष्णु और ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन मुखी लिंग विराजमान है। 

Trimbakeshwer Temple

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व  

त्र्यंबकेश्वर मंदिर के बारे धार्मिक ग्रन्थों में बताया गया है कि एक बार त्र्यंबक में बहुत वर्षों तक बारिश नहीं हुयी। जिसके कारण यहाँ से लोग पलायन करने लगे। इस समस्या के समाधान के लिए महर्षि गौतम जी ने छः महीने का कठोर तप करके भगवान वरुण देव जी को प्रसन्न किया। भगवान वरुण देव ने महर्षि गौतम से एक गड्डा खोदने को कहा और उस गड्डे को दिव्य जल से भर दिया। जिसके कारण वहाँ फिर से हरियाली आ गयी और सभी मनुष्य फिर से वापस अपने घरों में आने लगे, और सभी लोग महर्षि गौतम की प्रशंसा करने लगे। एक बार महर्षि गौतम के शिष्य उस गड्डे से जल भरने गये। उसी समय दूसरे ऋषि-मुनियों कि पत्नियाँ भी वहाँ आ गयी और पहले जल भरने का हठ करने लगी। ये सब देख गुरुमाता अहिल्या वहाँ आई और उन औरतों से कहा कि ये बालक पहले से यहाँ आए हैं तो पहले यही लोग जल भरेंगे।

उन ऋषि पत्नियों को लगा कि इस जल की व्यवस्था इनके पति ने की है इसलिए यह ऐसा बोल रही हैं। उन्होने घर जाकर अपने पतियों से इस बात को बड़ा चड़ा कर बोल दिया। इस बात से नाराज उन ऋषियों ने गौतम ऋषि से बदला लेने के लिए भगवान गणेश जी की पुजा करने लगे। जब भगवान गणेश जी के प्रकट हुए तो उन ऋषियों ने गौतम ऋषि को अपमानित करने के लिए उनकी सहायता करने के लिए कहा। उनकी बात सुनकर भगवान गणेश जी ने उन ऋषियों से कहा कि ऐसे ऋषि मुनि से द्वेष रखना गलत है जिसने अपने तप से जल कि व्यवस्था कर यहाँ के लोगों को जीवनदान दिया हो। लेकिन उन ऋषियों के हठ के कारण उनकी बात मान ली। और उन ऋषियों को चेतावनी भी दी कि इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा।

कुछ दिन बाद गणेश जी एक दुर्बल गाय बन कर महर्षि गौतम के खेत में पहुँच गयेजहां महर्षि गौतम खेत में धान काट रहे थे। गाय को देख कर महर्षि गौतम ने उसे अपने पास बुलाया और कुछ धान के तिनके खाने के लिए दिये उन तिनकों का स्पर्श होते ही गाय खेत में गिर गयी और कुछ समय पश्चात उसकी मौत हो गयी। यह सब देख वह दुष्ट ऋषि और उनकी पत्नियाँ उनके पास आई और उन पर गौ हत्या का पाप लगाने लगे उनसे कहने लगे कि जब तक तुम यहाँ रहोगे तब तक अग्नि देव और पित्र गण हमारे हवन को ग्रहण नहीं करेंगे। इसलिए तुम अपने परिवार सहित यहाँ से कहीं दूर चले जाओ। उनकी बात मानकर गौतम ऋषि त्र्यंबक से दूर एक कुटिया बनाकर रहने लगे। परंतु वह दुष्ट ऋषि-मुनि यहाँ भी उनको परेशान करने लगे और उनको हवन करने से भी रोकने लगे।

यह सब देख कर महर्षि गौतम ऋषि उन सबसे प्रार्थना करने लगे कि उन्हे बताएं वह इस पाप से कैसे मुक्त हो सकते हैं ? तब उन ऋषियों ने महर्षि गौतम से कहा कि तुम माँ गंगा को यहाँ ला कर उनके जल से स्नान करो और एक करोड़ शिव लिंग बनाकर महादेव की आराधना करोऔर फिर गंगा में स्नान कर इग्यारह बार ब्रह्मगिरी पर्वत की परिक्रमा करो। यह सब करने के बाद फिर सौ घड़े पानी से इन शिव लिंगों को नहलाने से ही तुम्हारा कल्याण होगा। उनकी बात मानकर महर्षि गौतम ने वही सब किया जो उन ऋषियों ने कहा था। उनकी तपस्या देखकर भगवान शिव ने उनको दर्शन दिये और वर मांगने को कहामहर्षि गौतम ने निष्पाप होने का वर मांगा। तब भगवान शिव ने कहा कि हे मुनिवर तुम सदा से ही निष्पाप हो इन दुष्टों ने तुम्हारे साथ छल किया है इनका कभी उद्धार नहीं होगा। भगवान शिव की बात सुन कर महर्षि गौतम आश्चर्य-चकित हुये।

उन्होने महादेव से कहाहे महादेव अगर आप मुझ पर प्रसन्न हो तो मुझे माँ गंगा को प्रदान कीजिये। उनकी बात सुन कर भगवान शिव जी माँ गंगा को पुनः धरती में अवतरित होने को कहा। तब माँ गंगा ने कहा मैं यहाँ तभी वास करूंगी जब भगवान शिव अपने परिवार के साथ यहाँ ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास करेंगे। भगवान शिव ने माँ गंगा की बात मानकर यहाँ त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास करने लगे। 

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त्र्यंबकेश्वर मंदिर का इतिहास  

प्राचीन समय में बने त्र्यंबकेश्वर मंदिर का पुनः निर्माण तीसरे पेशवा बाला साहेब अर्थात नाना साहेब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1755 ईस्वी से लेकर सन 1786 ईस्वी के बीच हुआ। तब से यह मंदिर अपने वर्तमान स्वरूप में बना हुआ है। प्राचीन तथ्यों के अनुसार इस मंदिर के निर्माण में लगभग सोलह लाख रूपये खर्च किये गये थे। 

Trimbakeshwer Temple

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त्र्यंबकेश्वर मंदिर की वास्तुकला  

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण सिंधु आरी शैली के अनुसार किया गया है। इस मंदिर के अंदर स्थित गर्भ गृह में त्रिमुखी शिवलिंग है। जिसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अवतार माना जाता है। यह मंदिर गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण काले पत्थरों से किया गया है। इस मंदिर परिसर के बीच में एक कुंड है जिसे कुशावर्धक कहते हैं। इस मंदिर में बने शिवलिंग में महाभारत काल के दौरान पांडवों ने एक रत्न जड़ित मकुट चढ़ाया था। यह मंदिर तीन पर्वतों के बीच में बसा हुआ है। जिस कारण इसे त्र्यंबकेश्वर मंदिर कहा जाता है। 

त्र्यंबकेश्वर मंदिर खुलने का समय  

त्र्यंबकेश्वर मंदिर सप्ताह के सभी दिन खुले रहता है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर का खुलने और बंद होने का समय नीचे दिया गया है-

समय                                             कार्यक्रम

सुबह 5:00 बजे                                मंदिर खुलने का समय।

सुबह 5:00 से 6:00 बजे                     आरती का समय।

सुबह 6:00 से 7:00 बजे                     जलाभिषेक/रुद्राभिषेक का समय।

सुबह 7:00 से 2:00 बजे                     दर्शन का समय।

दोपहर 3:00 बजे से शाम 9:00 बजे      दर्शन का समय।

रात्रि 9:30 बजे                                  मंदिर बंद होने का समय।

ऊपर दिया गया समय त्योहार के दिनों में बदल सकता है। भक्तों को सुबह के समय शिव लिंग को छूने की अनुमति होती है। सुबह 6:00 से 7:00 बजे तक जलाभिषेक और रुद्राभिषेक पूजा के लिए भक्त मुख्य देवता को छू सकते हैं।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पास घूमने वाले स्थान  

त्र्यंबकेश्वर मंदिर के आस आस घूमने वाले कुछ प्रमुख जगहों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है।

1- मुक्तिधाम मंदिर

मुक्तिधाम मंदिर में भगवान शिव जी के बारह ज्योतिर्लिंगों की झलक दिखती है। यह मंदिर संगमरमर के पत्थर से बना हुआ है। इस मंदिर की दीवारों पर महाभारत और भगवान कृष्ण के जीवन के बारे में लिखा गया हैऔर भगवान श्री कृष्ण यहाँ के प्रमुख देवता भी हैं। यह मंदिर नासिक के प्रमुख आकर्षणों में से एक भी है।

2- रामकुंड

रामकुंड नासिक के पुराने शहर में स्थित है। रामकुंड एक स्नान घाट है जहां वर्ष भर हजारों लोग स्नान करने के लिए आते है। ऐसा मान्यता है कि भगवान राम ने यहां पर अपने पिता राजा दशरथ की मृत्यु का अनुष्ठान किया था। इसीलिए लोग यहाँ पर अपने प्रियजनों की अस्थियां को लेकर आते हैंऔर मोक्ष की प्राप्ति के लिए इस पानी में उसका विसर्जनकरते हैं।

3- पांडवलेनी गुफाएं

पांडवलेनी गुफाएं 24 गुफाओं का एक समूह हैं जो लगभग दूसरी शताब्दी में बनाए गए थे। यह नासिक शहर से लगभग 10 किमी की दूरी पर स्थित हैं। यह एक पवित्र बौद्ध स्थल है। इन गुफाओं में बौद्ध धर्म की स्थापना के समय के शिलालेख और नक्काशीयां देखने को मिलती हैं। इन गुफाओं में 18 वें नंबर की गुफा सबसे प्रमुख गुफा हैजहाँ आपको एक प्रार्थना कक्ष और एक स्तूप देखने को मिलता है।

4- अंजनेरी हिल्स

त्र्यंबकेश्वर मंदिर से 10 किमी की चढ़ाई के बाद आप अंजनेरी हिल्स में पहुँच जाओगे। यह एक सुंदर आकर्षक पर्यटन स्थल हैयहाँ का मुख्य आकर्षण सबसे ऊपर की गुफा है। ऐसा माना जाता है कि यही वह गुफा है जहां देवी अंजना देवी ने भगवान हनुमान जी को जन्म दिया था। इसीलिए इसका नाम अंजनेरी हिल्स रखा गया। इस गुफा के अंदर भगवान हनुमान जी को समर्पित एक मंदिर है। जिसमें हनुमान जी की पांच सिरों वाली मूर्ति विराजमान हैं।

5- पंचवटी में सीता गुफा

नासिक में पंचवटी हिंदूओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह वही स्थान है जहां भगवान राम अयोध्या से अपने 14 साल के वनवास के दौरान रहे थे। जैसे ही आप पंचवटी क्षेत्र में प्रवेश करते हो तो आप यहाँ उस गुफा के दर्शन कर पाएंगे जहां देवी सीता माता रहती थी। 

Trimbakeshwer Temple

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त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कैसे पहुँचें ?

त्र्यंबकेश्वर मंदिर हवाई मार्ग से पहुँचने के लिए सबसे निकटतम मुंबई हवाई अड्डा है। जो मंदिर से 178 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।  जहां से आप टैक्सी के माध्यम से पहुँच सकते हो।

 ट्रेन द्वारा त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिए  नासिक रेलवे स्टेशन सिर्फ 37 किलोमीटर की दूरी पर है। जहां से आप टैक्सी के माध्यम से पहुँच सकते हो।

सड़क द्वारा त्र्यंबकेश्वर मंदिर के लिये नागपुरमुंबईपुणे आदि से बस सेवा उपलब्ध हैअन्यथा यात्री अपनी पसंद के अनुसार कार या टैक्सी किराए पर लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

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त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पास होटल  

त्र्यंबकेश्वर मंदिर के आस-पास के होटलों की लिस्ट नीचे दी गयी हैआप अपनी सुविधानुसार किसी भी होटल में रुक सकते है-

1-Hotel Krushna Inn.

2-Hotel Dhruv Palace.

3-Hotel Kaka's Sai Krupa.

4-Athaang Beach Resort.

5-Serina House Malvan.

6-Hotel Chivala Beach.

7-Ashoka Holidays.

8-Capella Forest Retreat & Homestay.

9-Happy Panda Hostel.

10-Andores Resort And Spa

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो त्र्यंबकेश्वर मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट के माध्यम से त्र्यंबकेश्वर मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

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Note

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