सिंहाचलम मंदिर (Simhachalam Temple History In HIndi)

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का मेरे ब्लॉग Mandir Diary में जिसमे मैं आज आपको सिंहाचलम मंदिर (Simhachalam Temple History In HIndi) के बारे में बताऊंगा। यह मंदिर दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में विशाखापत्तनम शहर के पास ही सिंहाचलम नामक पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित 32 मंदिरों में से एक प्रमुख मंदिर है। सिंहाचलम मंदिर भगवान विष्णु के नवें अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के दो अवतारों वराह और नरसिंह अवतार के लिए प्रसिद्ध है। सिंहाचलम मंदिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है।

सिंहाचलम मंदिर का धार्मिक महत्व  

सिंहाचलम मंदिर के बारे में धार्मिक पुराणों में बताया गया है कि भक्त प्रहलाद ने ही इस जगह पर नरसिंह भगवान का पहला मंदिर बनवाया था। यह मंदिर भक्त प्रहलाद ने नरसिंह भगवान द्वारा उनके पिता के संहार के बाद बनवाया था। लेकिन सतयुग के बाद इस मंदिर का रख रखाव नहीं हो सका और यह मंदिर धरती के अंदर समा गया। कई वर्षों के बाद चंद्र वंश के राजा पुरुरवा अपनी पत्नी उर्वशी के साथ भगवान ब्रह्मा जी द्वारा दिये गए पुष्पक विमान (दिव्य वायु यान) से आसमान में घूम रहे थे। उसी समय उनका विमान किसी प्राकर्तिक शक्ति से प्रभावित होकर दक्षिण भारत के सिंहाचल पर्वत में जा पहुंचा। उन्होने देखा कि उस पर्वत में भगवान नरसिंह की प्रतिमा धरती के अंदर समाई हुयी है। उन्होने उस प्रतिमा को निकाला और जैसे ही उस प्रतिमा में लगी धूल साफ को साफ करने लगेतभी एक आकाशवाणी हुयी कि इस प्रतिमा को साफ करने से अच्छा है कि इस प्रतिमा में चन्दन का लेप लगाकर इसे पूरी तरह ढक दो।

Simhachalam Temple, सिंहाचलम मंदिर

आकाशवाणी में उनसे यह भी कहा गया कि इस प्रतिमा में लगे लेप को साल में सिर्फ एक बार वैशाख महीने में अक्षया तृतीया के दिन ही हटाया जाय और उसी दिन इस प्रतिमा के वास्तविक दर्शन होंगे। आकाशवाणी का अनुसरण करते हुये राजा पुरुरवा ने मूर्ति पर चन्दन का लेप लगाया और भगवान नरसिंह कि उस प्रतिमा को सिंहाचल पर्वत में ही स्थापित कर दिया। उसी दिन से साल में सिर्फ वैशाख महीने के अक्षया तृतीया के दिन ही इस मंदिर का लेप हटाया जाता है। भगवान नरसिंह का यह मंदिर विश्व के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है।

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सिंहाचलम मंदिर का इतिहास  

सिंहाचलम मंदिर कि स्थापना सतयुग में भक्त प्रहलाद द्वारा की गयी थी। वर्तमान समय में इस मंदिर का इतिहास लगभग 1000 वर्ष पुराना है। प्राचीन इतिहासकारों के अनुसार चोल राजा कुलोत्तुंगा प्रथम के शिलालेख के अनुसार ही सिंहाचलम मंदिर को 11वीं शताब्दी का होने की मान्यता मिली है। इसी शिलालेख से पता चलता है कि यह मंदिर चोल राजा कुलोत्तुंगा के युग से संबंधित है। एक अन्य शिलालेख से पता चलता है कि इस मंदिर के गर्भगृह का निर्माण सन 1267 ईस्वी में किया गया था। एक और शिलालेख है जो राजा कृष्णदेव राय द्वारा छोड़ा गया है जो उड़ीसा के शासक के खिलाफ अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए सन 1516 ईस्वी और 1519 ईस्वी में दो बार इस मंदिर में गए थे। इसके अलावा मंदिर में प्राचीन ग्रंथ भी हैं जो तेलुगु और उड़िया भाषा में लिखे गए हैं यह ग्रंथ भी सिंहचलम मंदिर के निर्माण के बारे में बताते हैं। इसलिए किसी एक का नाम इस स्थान के निर्माण पर समर्पित करना बहुत कठिन है। 

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सिंहाचलम मंदिर की वास्तुकला  

सिंहाचलम मंदिर विशाखापत्तनम के उत्तर दिशा में दस मील की दूरी पर सिंहचलम पर्वत्त पर स्थित है। यह पर्वत्त श्रृंखला पूर्वी घाट का एक हिस्सा हैइसे कैलासा नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 1500 मीटर की है। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान नरसिंह और भगवान वराह की 2.5 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है। मंदिर के गर्भ गृह के सामने मंदिर का मुख मंडप स्थापित है। मंदिर की दीवारों पर तेलुगु और उड़िया भाषा में लिखे गए 252 शिलालेख हें। यह मंदिर उड़ीसा और द्रवीण वास्तुकला शैली में बनाया गया है। मंदिर परिसर में कन्यान मंडप हैजिसमें 96 नक्कासी युक्त सुंदर स्तम्भ स्थापित हैं। इस मंदिर में में भगवान विष्णु के अन्य अवतार जैसे मतस्य अवतारधनवन्तरी अवतार आदि अवतारों की प्रतिमा स्थापित की गयी है।  

Simhachalam Temple, सिंहाचलम मंदिर

सिंहचलम मंदिर के खुलने का समय  

सिंहाचलम मंदिर के खुलने के समय और दर्शन के बारे में नीचे जानकारी दी गई है। 

मंदिर खुलने का समय सुबह 4:00 है।

सुप्रभात दर्शनम सुबह 4.30 बजे से सुबह 5 बजे तक शुरू होता है।

सिंहाचलम मंदिर आराधना सेवा सुबह 5 बजे से सुबह 6.30 बजे तक।

सिंहचलम मंदिर मुफ्त दर्शन सुबह का समय सुबह 6.30 बजे से 11.30 बजे तक।

नित्य कल्याणम सेवा सुबह 9.30 बजे से शुरू।

राजभोगम सेवा का समय सुबह 11.30 से दोपहर 12.30 बजे तक ।

सिंहचलम मंदिर दोपहर मुफ्त दर्शन समय दोपहर 12.30 से दोपहर 2.30 बजे तक।

दोपहर 2.30 बजे से 3 बजे तक के अवकाश।

संध्या नि:शुल्क दर्शन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक। 

रात्रि आराधना शाम 7 बजे से 8.30 बजे तक।

सिंहचलम मंदिर आराधना सेवा का समय शाम 7 बजे से 8.30 बजे तक।

सिंहाचलम मंदिर आराधना सेवा की टिकट की कीमत 100 रुपये है।

एकल व्यक्ति के लिए आराधना सेवा मुफ्त दर्शन रात 8.30 से रात 9 बजे तक।

रात्री 9:00 मंदिर बंद हो जाता है।

सिंहाचलम मंदिर के पास घूमने की जगह 

सिंहाचलम मंदिर के आस पास के घूमने वाली प्रमुख जगहों के बारे में नीचे जानकारी दी गयी है।

1- इंदिरा गांधी प्राणी उद्यान

इंदिरा गांधी प्राणी उद्यान आंध्र प्रदेश में कंबालाकोंडा रिजर्व फॉरेस्ट के बीच में स्थित है। यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है। इस उद्यान का नाम हमारे देश की पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर रखा गया है। इसे 19 मई 1977 को जनता के लिए खोल गया था। यह उद्यान 625 एकड़ का क्षेत्र में फैला हुआ है। इस चिड़ियाघर पार्क में प्राइमेट, मांसाहारी, कम मांसाहारी, छोटे स्तनपायी, सरीसृप, और अनेक प्रकार के पक्षी देखने को मिलते हैं।

2- VMRDA कैलासगिरी

कैलासगिरी विशाखापत्तनम शहर के पास एक पहाड़ की चोटी पर स्थित पार्क है। इस पार्क को विशाखापत्तनम मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा बनाया गया था। इस पहाड़ की चोटी से पूरा विशाखापत्तनम शहर देखता है। आंध्र प्रदेश सरकार ने 2003 में कैलाशगिरी को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल के रूप में सम्मानित किया। यहाँ हर साल लगभग तीन लाख से भी अधिक पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। कैलासगिरी विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किमी और विशाखापत्तनम द्वारका बस स्टेशन से लगभग 8 किमी दूर स्थित है।

3- रामकृष्ण बीच

रामकृष्ण बीच को आर के बीच के नाम से भी जाना जाता है। यह बीच आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बंगाल की खाड़ी के किनारे पर स्थित है। इस बीच का नाम समुद्र तट के पास स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के नाम पर पड़ा है।

4- कंबालाकोंडा वन्यजीव अभयारण्य

कंबालाकोंडा वन्यजीव अभयारण्य विशाखापत्तनम के पास स्थित एक जंगल है। यह पूरा जुंगल आंध्र प्रदेश वन विभाग के नियंत्रण में है। वन विभाग से पहले यह भूमि विजयनगरम के महाराजा के नियंत्रण में थी। इसका नाम स्थानीय पहाड़ी कंबालाकोंडा के नाम पर रखा गया था। यह एक सूखा सदाबहार जंगल है, जो झाड़ियों और घास के मिश्रित मैदानों से बना है। इस जुंगल में संकेतक प्रजाति के भारतीय तेंदुआ पाये जाते हैं।

5- समुद्री युद्ध स्मारक पर विजय

यह सी मेमोरियल सन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद बनाया गया है। यह स्मारक भारत की विजय का प्रतीक है। जो भारतीय नौसेना और पूर्वी नौसेना कमान के नाविकों को समर्पित है। इस स्मारक निर्माण सन 1996 में किया गया था। यह विशाखापत्तनम के बीच रोड पर स्थित है।

Simhachalam Temple, सिंहाचलम मंदिर

सिंहाचलम मंदिर कैसे पहुंचे  ?

हवाई मार्ग से सिंहाचलम मंदिर में पहुँचने के लिये विशाखापत्तनम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से टैक्सी या बस के माध्यम से पहुँच सकते हो। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी लगभग 14 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से सिंहाचलम मंदिर में पहुँचने के लिये सिंहाचलम रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस के माध्यम से पहुँच सकते हो। रेल मार्ग से मंदिर की दूरी लगभग 11 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से सिंहाचलम मंदिर में पहुँचने के लिये आंध्र प्रदेश राज्य के किसी भी शहर से परिवहन निगम की बसों,निजी बसों और टैक्सियों के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं। 

सिंहचलम मंदिर के पास होटल  

सिंहाचलम मंदिर के पास स्थित होटलों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है। यह सभी होटल मंदिर के पास ही स्थित है। आप अपनी सुविधानुसार नीचे दिये गए किसी भी होटल में रुक सकते हैं-

1-Ambica Sea Green.

2-Daspalla Executive Court.

3-BAJAJ HOME STAY.

4-Dolphin Hotel.

5-MYTRI NIVAS.

6-Fairfield by Marriott Visakhapatnam.

7-Hotel Cool River.

8-SHREE LAKSHMI GUEST HOUSE.

9-Ahvanam Guest House.

10-Hotel Winsar Park.

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो सिंहाचलम मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट के माध्यम से सिंहाचलम मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

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Note

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