Ambaji Temple History In Hindi, अंबाजी मंदिर, 2021

 

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अम्बाजी मंदिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का मेरे एक नए लेख में जिसमें मैं आज आपको अंबाजी मंदिर के बारे में बताऊंगा। यह मंदिर गुजरात और राजस्थान राज्यों की सीमा पर बनासकांठा जिले के दंता तालुका क्षेत्र में स्थित है। यह सरस्वती नदी के उद्गम स्थान के पास अरासुर पर्वत की पहाड़ियों के ऊपर विराजमान है। अंबाजी माता का मंदिर भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। यह माता के 51 शक्ति पीठों में से भी एक प्रमुख शक्ति पीठ है। इस पवित्र मंदिर को अरसुरी अम्बे के नाम से भी जाना जाता है। 


विषय सूची

1-  अंबाजी मंदिर का इतिहास।

2-  मंदिर का धार्मिक महत्व।

3-  मंदिर कि भौगोलिक स्थित।

4-  मंदिर का खुलने का समय।

5-  अम्बाजी मंदिर में कैसे पहुंचे ?

 

अंबाजी मंदिर का इतिहास History of Ambaji Temple

अंबाजी मंदिर के बारे में माना जाता हैकि यह मंदिर बारह सौ साल से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर का निर्माण वल्लभ भाई शासक और सूर्यवंश के सम्राट अरुण सेन ने 8 वीं शताब्दी के दौरान करवाया था। बाद में इस मंदिर का पुनर्निर्माण राज्य सरकार द्वारा किया गया है। मंदिर के पुनर्निर्माण में भी सोने का उपयोग किया जाता है। मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश स्थापित हैं। यह मंदिर अम्बा माता का प्रमुख मंदिर हैजिसकी पूजा पूर्व वैदिक काल से की जाती रही है। अरावली पर्वत श्रृंखला के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर सरस्वती नदी के स्रोत के पास और अरासुर पहाड़ियों पर स्थित होने के कारण इसे अरासुरी अम्बा के रूप में भी जाना जाता है। यह मंदिर गुजरात के उत्तरी भाग में स्थित होने के कारण किसी भी व्यक्ति के लिए इस पूजा स्थल तक पहुंचना काफी आसान है।

अंबाजी मंदिर में कोई मूर्ति या चित्र नहीं है। मंदिर के भीतरी दीवार में गोख जैसी एक साधारण गुफा है। जिसमें सोने का एक पवित्र शक्ति वीजा श्री यंत्र रखा गया है। जो कुरमा उत्तल आकार का है, उसमें 51 बीज अक्षर हैं। जो नेपाल के मूल यंत्रों से जुड़ा हुआ है, और उज्जैन के शक्तिपीठों में भी इसी तरह से स्थापित किया गया है। इस मंदिर के अंदर न तो अतीत में कोई फोटो खींची गई और न ही भविष्य में ऐसा किया जा सकता है। इस वीजा श्री यंत्र की पूजा आंखों पर पट्टी बांधने के बाद ही की जाती है। अरासुरी अम्बे माता या अर्बुदा माताजी परमारों की कुलदेवी हैं। एक परमार राज्य अंबाजी शहर यानी दंता के पास स्थित है। जो पूरे परमार वंश की राजधानी के रूप में स्थापित है।


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 अंबाजी मंदिर गब्बर ambaji temple gabbar

अंबाजी मंदिर का एक छोटा सा मंदिर गब्बर पहाड़ीयों की चोटी पर भी स्थित है। यह मंदिर अरावली की प्राचीन पहाड़ियों के बीच में बसा हुआ है। गब्बर पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस पवित्र मंदिर तक पहुँचने के लिए 999 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यह मंदिर माता अंबिका के मुख्य मंदिर में स्थित वीजा श्री यंत्र के ठीक सामने वाली पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर के पास के दर्शनीय स्थलों में सूर्यास्त बिंदुमाताजी की गुफा और झूले और रोपवे की यात्राएं आदि शामिल हैं।


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 अंबाजी मंदिर का धार्मिक महत्व Religious Significance of Ambaji Temple

अंबाजी मंदिर के बारे में पौराणिक कथाओं में बताया गया हैकि देवी सती ने अपने पिता राजा दक्ष द्वारा आयोजित हवन की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए थे। जिसके बाद भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे थे। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र का उपयोग करके माता सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित किया। वह 51 भाग जहां पर गिरे उनको शक्तिपीठ कहा गया। इस स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था। इसीलिए यह मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ है। अंबाजी शक्ति पीठ में सभी त्योहार मनाए जाते हैं। खासकर दुर्गा पूजा और नवरात्रि के त्योहार में यहाँ विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का मुंडन संस्कार भी इसी मंदिर में हुआ है। और सतयुग में भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद इस मंदिर में आकर माता के शक्ति स्वरूप की पुजा आराधना की थी।

 

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अंबाजी मंदिर की वास्तुकला Ambaji Temple Architecture

अंबाजी मंदिर संगमरमर के पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर में सोने का शंकु आकार छत बनी हुयी है। मंदिर के मूल रूप को नागर ब्राह्मणों द्वारा बनाया गया था। मंदिर के सामने एक मुख्य प्रवेश द्वार है। मंदिर के सामने एक खुला वर्गाकार क्षेत्र है। जहां पर हवन और औपचारिक बलिदान किया जाता है। मंदिर के आंतरिक गर्भगृह में चाँदी से बनाए गए दरवाजे स्थित हैं। इसके दीवार में एक गोख है, जहां विसो यंत्र का एक पुराना संगमरमर का शिलालेख रखा हुआ हैजो इस मंदिर में पूजा का मुख्य केंद्र है। इस मंदिर देवी की कोई मूर्ति स्थित नहीं है। यह मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है। यहाँ पुजा अर्चना से पहले पुजारी गोख के ऊपरी हिस्से को इस तरह से सजाते हैं कि यह दूर से देवी की मूर्ति की तरह दिखता है। माता अंबा का मूल निवास स्थान गब्बर की पहाड़ी पर स्थित मंदिर माना जाता है। अंबाजी मंदिर से थोड़ी दूरी पर एक बड़ा आयताकार कुंड है। जिसके चारों तरफ सीढ़ियां बनी हुई है। जिसे इस मंदिर का मानसरोवर कहा जाता है। नवरात्रियों का त्योहार अंबाजी के मंदिर में पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ गरबा नृत्य करके मनाया जाता है।

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माता अंबाजी की पुजा सामग्री Worship material of Mata Ambaji

अंबाजी मंदिर में माता की पुजा में लगने वाली सामग्रीओं के नाम नीचे दिये गए हैं-

जिसमें बिना इस्तेमाल किया लाल कपड़े का टुकड़ा।

श्रृंगार सामग्री (सिंदूरमेहंदीकाजलबिंदीचूड़ियाँपैर की अंगुली की अंगूठीकंघीआलतादर्पणपायलइत्रझुमकेनोजपिनहारलाल चुनरीमहावरहेयरपिन आदि)।

तिल या सरसों का तेल या घी दीपक अखंड ज्योति के लिए।  

कपास की बत्ती।

एक चौकी (लकड़ी का चबूतरा मूर्ति रखने के लिए )

अगरबत्ती या धूप।

नारियल।

अक्षत (चावल के दाने)।

पान और सुपारी।

देवी दुर्गा की फोटो या पंच धातु से बनी मूर्ति (पांच धातु)।

कुमकुम हल्दी चंदन।

कपूर।

पवित्र धागा (लाल और पीला)।

मिठाई।

फूल।

फल (केला और कोई अन्य फल)।

लौंग-इलायची (लौंग और इलायची)।  

बताशा नैवेद्य या भोग।

कुछ सिक्के भेट चढ़ाने के लिए।

 

अंबाजी मंदिर का खुलने का समय Ambaji temple opening hours

अंबाजी मंदिर का खुलने और बंद होने का समय नीचे दिया गया है-

1- सुबह 6:00 बजे मंदिर खुलने का समय।

2- सुबह 7;30 से 8:00 बजे तक आरती।

3- सुबह 8:00 बजे से 11:30 तक दर्शन।

4- दोपहर 12:00 बजे राज भोग आरती

5- दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:30 बजे दर्शन।

6- शाम 7:00 से 7:30 बजे तक आरती।

7- शाम 7:30 से रात 9:00 बजे तक दर्शन।

8- रात्री 9:00 बजे मंदिर बंद होने का समय।


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अंबाजी मंदिर के पास दर्शनीय स्थल ambaji temple near visiting places

अंबाजी मंदिर के आस पास के देखने वाले प्रमुख स्थानों के बारे में नीचे जानकारी दी गई है।

1- कैलाश हिल

कैलाश हिल अंबाजी माता मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है। इस पहाड़ी से सूर्यास्त का दृश्य के दिखने के अलावा यह पूजा का स्थान भी है, क्योंकि इसमें एक शिवालय भी स्थित है। यहां शैव मंदिर में हाल ही में बनाया गया जटिल पत्थर का प्रवेश द्वार है। इस मंदिर के पास में ही एक बगीचा भी है जिसे मंगल्या वन कहा जाता है।

2- कामाक्षी मंदिर

कामाक्षी मंदिर अंबाजी से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह दक्षिण भारतीय मंदिर की स्थापत्य शैली का समान ही बना हुआ है। इस मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के साथ कई अन्य छोटे मंदिर भी हैं।

3- कोटेश्वर        

गुजरात के कच्छ जिले के पश्चिम में कोटेश्वर नाम का एक छोटा गांव है। यह अपने धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ पर एक प्राचीन शिव मंदिर और नारायण सरोवर का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्णित पांच पवित्र झीलों में से एक है।

 

अंबाजी मंदिर में कैसे पहुंचे How to reach Ambaji Temple ?

हवाई मार्ग से अंबाजी मंदिर में पहुँचने के लिये सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डे से टैक्सी या बस के माध्यम से पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी लगभग 160 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से अंबाजी मंदिर में पहुँचने के लिये आबू रोड रेलवे स्टेशन से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हो। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 24 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से अंबाजी मंदिर में पहुँचने के लिये गुजरात राज्य के किसी भी शहर से परिवहन निगम की बसों,निजी बसों और टैक्सियों के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं।


Ambaji Temple Road Map


 

अंबाजी मंदिर के पास होटल hotels near ambaji temple

अंबाजी मंदिर के पास स्थित होटलों की जानकारी नीचे दी गयी है। आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी होटल में रुक सकते हैं। ये सभी होटल अंबाजी मंदिर के पास ही स्थित हैं।

1-Hotel Sunrise Palace.

2-SHREE HOTEL.

3-Hotel Asopalav.

4-Hotel Rajmandir.

5-Hotel Green Park.

6-Hotel Mount Regency.

7-Hotel Mount Way.

8-Hotel Chandrawati Palace.

9-Hotel Royal Heritage.

10-Sun Hotel & Resort.

 

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको अंबाजी मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैंआप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

 Note        

अगर आपके पास अंबाजी मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैंया आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं। 

 

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