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Kailasnath Temple History In Hindi, कैलाशनाथ मंदिर, 2021

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कैलाशनाथ मंदिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है मेरे एक और नए लेख में जिसमें मैं आज आपको कैलाशनाथ मंदिर के बारे में बताऊंगा। यह मंदिर महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद के निकट अजंता और एलोरा की गुफाओं में स्थित है। यह मंदिर पहले माणिकेश्वर के नाम से जाना जाता था। यह मंदिर भारत में स्थित रॉक-कट हिंदू मंदिरों में सबसे बड़ा मंदिर है। एलोरा में कई जैन और बौद्ध गुफाएं भी देखी जाती हैं। कैलाशनाथ मंदिर बौद्ध, जैन और हिंदू गुफा मंदिरों व मठों में सबसे बड़ा मंदिर है, जिन्हें सामूहिक रूप से एलोरा गुफाओं का ही एक हिस्सा माना जाता है। कैलाशनाथ मंदिर अपनी स्थापत्य कला की भव्यता के साथ-साथ अपने मूर्तिकला वैभव के लिए जाना जाता है। यह मंदिर अपने आप में ही एक अनोखा मंदिर है। जिसकी सुंदरता और कारीगरी देखते ही बनती है। 


विषय-सूची

              1-मंदिर का इतिहास।

              2-मंदिर की वास्तुकला।

              3-मंदिर के तथ्य।

              4-मंदिर कैसे पहुँचें ?

 

कैलाशनाथ मंदिर एलोरा का इतिहास History of Kailashnath Temple Ellora

कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण 6 वीं से 9 वीं शताब्दी के दौरान किया गया। यहाँ पर उस समय एलोरा की पहाड़ी में ३० से अधिक मंदिरों की नक्काशी की गई है। इनमें से सबसे शानदार कैलाशनाथ मंदिर है। कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट शासक राजा कृष्ण प्रथम द्वारा 756 ईस्वी 773 ईस्वी के दौरान किया गया था। एलोरा में स्थित शिव मंदिर के बारे में कहा गया है, कि राजा ने इतने चमत्कारिक रूप से इस मंदिर का निर्माण किया कि देवता और वास्तुकार भी चकित रह गए। कैलास मंदिर के निर्माण में कई विशिष्ट स्थापत्य और मूर्तिकला शैलियों का उपयोग किया गया है।

प्राचीन इतिहासकार हरमन गोएट्ज़ (1952) ने सिद्धांत दिया कि कैलास मंदिर का निर्माण दंतिदुर्ग के शासनकाल के दौरान शुरू हुआ था। राजा कृष्ण ने इसके पहले पूर्ण संस्करण का अभिषेक किया, जो वर्तमान मंदिर से बहुत छोटा था। गोएट्ज़ के अनुसार, मंदिर के निर्माण में दंतिदुर्ग की भूमिका को जानबूझकर दबा दिया गया, क्योंकि कृष्ण ने दंतीदुर्ग के पुत्रों को उनकी मृत्यु के बाद सिंहासन का दावा करने से अलग कर दिया था। उन्होने आगे बताया की कि बाद के राष्ट्रकूट शासकों ने भी मंदिर का विस्तार किया। इन शासकों में ध्रुव धारावर्ष, गोविंदा तृतीय, अमोघवर्ष और कृष्ण तृतीय शामिल हैं। और ११वीं शताब्दी के परमार शासक भोज ने दक्कन पर अपने आक्रमण के दौरान हाथी-शेर की आकृति को निचले तल पर स्थापित किया और चित्रों की एक नई परत जोड़ी। अंत में अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर में चित्रों की अंतिम परत स्थापित की।

कैलाशनाथ मंदिर के बारे में अधिकतर इतिहासकारों का मानना है कि मंदिर का प्रमुख हिस्सा राजा कृष्ण प्रथम के शासनकाल के दौरान पूरा हुआ था, लेकिन मंदिर परिसर के कुछ अन्य हिस्सों का निर्माण अन्य शासकों द्वारा भी किया गया था।

 

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जाने भारतीय मंदिरों के इतिहास के बारे में 


कैलाशनाथ मंदिर की वास्तुकला Architecture of Kailasanathar Temple

कैलाशनाथ मंदिर द्रविड़ शैली में बना हुआ है। मंदिर में एक प्रवेश द्वार है जहां पर नंदी के लिए एक घेरा है, और गर्भगृह के सामने एक मंडपम बनाया गया है, जो क्रमानुसार घटती हुयी मंजिलों से बना है। गर्भगृह के सामने मंडपम में नक्काशीदार स्तंभों वाला एक विशाल हॉल स्थित है। नंदी मंडपम के दोनों ओर दो 50 फीट ऊंचे स्तंभ हैं जिन्हें भुरभुरी नक्काशी से सजाया गया है। चट्टान के तल के में एक कोलोनेड गैलरी है जो मंदिर के चारों ओर एक गहरा संकीर्ण मार्ग बनाती है। इस चट्टान के मुख और मंदिर के बीच में प्रदक्षिणापथ है। ऊपर वर्णित संकीर्ण मार्ग में हॉल और पोर्टिको वाली दीर्घाओं के दो मंजिल हैं (जैसे तमिलनाडु के द्रविड़ मंदिरों) में है ।

मंदिर 60000 वर्ग फुट से अधिक के क्षेत्र में स्थित है, और विमानम (टॉवर) लगभग 9० फीट की तक ऊंचा है। यह पूरा मंदिर निर्माण से नहीं बल्कि खुदाई करके बनाया गया है। कैलाशनाथ मंदिर की बनावट तमिलनाडु में चेन्नई के पास मल्लापुरम में मंदिर की मीनार रथों से मिलती जुलती है। यह मंदिर मल्लापुरम के पल्लवों द्वारा स्थापित स्थापत्य शैली से मिलता-जुलता है। मंदिर के शिखर (विमानम) में गढ़ी हुई मूर्तियाँ इस बात को प्रदर्शित करती हैं। मल्लापुरम में तट मंदिर और यह मंदिर लगभग एक ही समय में बनाये गये थे। कैलाशनाथ मंदिर के किनारे में स्थित मंदिरों का निर्माण भी पत्थर से किया गया था। एलोरा में कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण 400000 टन की चट्टान की खुदाई करके बनाया गया था।  

यह मंदिर की योजनाओं को तैयार करने वाले दूरदर्शी लोगों की ओर से शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन करता है। इस मंदिर का निर्माण दक्षिणी पल्लव साम्राज्य के वास्तुकारों द्वारा की गई थी। एलोरा की अन्य गुफाएं में रामेश्वर गुफा, सीता की नहानी गुफा, इंद्र सभा गुफा और कई जैन गुफाएं हैं, ये सभी 6 वीं से 9 वीं शताब्दी की अवधि बनाई गयी हैं। 

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कैलाशनाथ मंदिर के पास पर्यटन स्थल Kailashnath Temple Near Tourist Places

कैलाशनाथ मंदिर के आस पास घूमने वाली कुछ प्रमुख जगहों के बारे में नीचे जानकारी दी गयी है।

1- घृष्णेश्वर मंदिर 

घृष्णेश्वर मंदिर जिसे घृणेश्वर या घुश्मेश्वर मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। शिव पुराण में बताया गया है कि यह भगवान शिव को समर्पित प्रमुख मंदिरों में से एक है। घृणेश्वर शब्द का अर्थ है करुणा का स्वामी। यह मंदिर हिंदू धर्म की शैव परंपराओं में एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। जो इसे अंतिम या बारहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में मानता है। यह तीर्थ स्थल एलोरा के पास ही स्थित है। जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल एलोरा गुफाओं से लगभग 5 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है।

2- दौलताबाद किला 

इस किले को देवगिरी किला के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद के पास देवगिरी गाँव में स्थित एक ऐतिहासिक किलेदार गढ़ है। प्राचीन समय में यह यादव वंश की राजधानी थी। कुछ समय के लिए दिल्ली सल्तनत की राजधानी भी बनी थी। इसका निर्माण छठी शताब्दी के आसपास हुआ था। वर्तमान समय में यह औरंगाबाद के पास एक महत्वपूर्ण शहर के रूप में बसा हुआ है। देवगिरी गाँव में बसे इस ऐतिहासिक किले का निर्माण यादव राजा भीलमा वी द्वारा 1187 के आसपास बनाया गया था। इस मंदिर से किले कि दूरी लगभग 13 किलोमीटर है।

3- औरंगाबाद गुफाएं 

औरंगाबाद गुफा में बारह रॉक-कट बौद्ध मंदिर हैं, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के करीब पश्चिम में एक पहाड़ी पर स्थित हैं। औरंगाबाद गुफाओं का पहला उल्लेख महान चैत्य में मिलता है। औरंगाबाद की गुफाओं का निर्माण छठी और सातवीं शताब्दी के दौरान नरम बेसाल्ट की चट्टानों को खोदकर किया गया था। इन गुफाओं को उनके स्थान के आधार पर तीन अलग-अलग समूहों में विभाजित किया जाता है। यह गुफाएं मंदिर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

4- चांद मीनार 

चांद मीनार दौलताबाद में एक मध्ययुगीन मीनार है। यह टावर महाराष्ट्र राज्य में दौलताबाद-देवगिरी किला परिसर के पास स्थित है। इसे 1445 ईस्वी में राजा अला-उद-दीन बहमनी द्वारा किले पर कब्जा करने की याद में बनवाया गया था। चांद मीनार दिल्ली के कुतुब मीनार से मिलती-जुलती है, और उससे ही प्रेरित भी है। चांद मीनार को दक्षिणी भारत में इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के बेहतरीन नमूनों में से एक माना जाता है। यह मीनार 63 मीटर ऊंचा है। यह मीनार मंदिर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

5- श्री भद्रा मारुति मंदिर खुल्लाबाद 

भद्रा मारुति मंदिर औरंगाबाद के पास खुल्दाबाद में स्थित हिंदू देवता हनुमान जी को समर्पित एक मंदिर है। यह मंदिर एलोरा की गुफाओं से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति को सोने की मुद्रा में चित्रित किया गया है। यह केवल तीन स्थानों में से एक है जहां हनुमान को शयन मुद्रा में दर्शाया गया है। दूसरा स्थान इलाहाबाद और उत्तर प्रदेश में संगम में गंगा के तट पर एक मंदिर है और तीसरा स्थान जाम सावली मध्य प्रदेश में है। भद्रा मारुति मंदिर औरंगाबाद के पास पर्यटकों के प्रमुख आकर्षणों  में से एक माना जाता है।


कैलाशनाथ मंदिर के तथ्य Facts of Kailasnath Temple

1-कैलाशनाथ मंदिर एलोरा गांव में चरणनंदरी पहाड़ियों की एक ही चट्टान को उकेर कर बनाया गया एक मंदिर है। कलाकारों ने एक बिंदु पर एक विलक्षण पत्थर को उकेर और खोखला कर उसके अंदर कैलसनाथ मंदिर को बनाया है।

2- कैलाशनाथ मंदिर को भगवान शिव के निवास स्थान कैलाश पर्वत की तरह बनाया गया है। जब विशेषज्ञों ने इसकी जांच की तो उन्होने देखा शुरू में कलाकारों ने पूरे मंदिर को सफेद रंग से रंग दिया जिससे यह मंदिर कैलाश पर्वत जैसा दिख सके। इसकी पिरामिडनुमा संरचना भी पर्वत की तरह दिखती है।

3- कैलाशनाथ मंदिर दुनिया के सबसे पुराने सिंगल-रॉक नक्काशी, बहुमंजिला मंदिरों में से एक है। इस मंदिर ने पश्चिमी पुरातत्वविदों को चकित कर दिया, जिन्होंने इसे एथेंस में पार्थेनन के आकार में दोगुना पाया।

4- कैलाशनाथ मंदिर के बारे में सबसे रहस्यमय तथ्यों में से एक तथ्य यह भी है कि इस मंदिर की उत्पत्ति, निर्माणकर्ता और निर्माणकर्ताओं के बारे में नहीं जानता है। इसका निर्माण किस तारीख में हुआ यह पता नहीं चलता है, और ना ही किसी स्थान पर इसको दर्शाया गया है।  जिससे पता चलता कि यह नक्काशी कितने साल पुरानी है।

5- कैलाशनाथ मंदिर का प्रत्येक स्तंभ एक दिव्य भाषा बोलता है। चट्टान के ऊपर का दृश्य पूरे निर्माण के विशाल पैमाने को दिखाता है। विशेष रूप से, वह मूर्तिकला दृश्य जिसमें रावण को कैलाश पर्वत उठाते हुए दिखाया गया है। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला के इतिहास में एक प्रमुख मील का पत्थर साबित हुआ है।

6- कैलाशनाथ मंदिर के सबसे अकल्पनीय और रहस्यमय तथ्यों में से एक इस मंदिर की  ऊपर से नीचे तक की गयी नक्काशी है। केवल छेनी और हथौड़ों का उपयोग करके इतने शानदार और उत्तम मंदिर का निर्माण करना असंभव है।

7- पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि मूर्तिकारों ने इस व्रहद आकार के मंदिर निर्माण के लिए चार टन से अधिक चट्टानें निकालीं। इस आधुनिक समय में 10 टन की सबसे बड़ी जेसीबी मशीनों का उपयोग करके भी इस तरह के मंदिर का निर्माण करना असंभव है।

8- कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण वैदिक परंपरा के अनुसार किया गया है। मंदिर का निर्माण शुरू करने से पहले, मूर्तिकारों ने एक महायज्ञ किया और मंदिर के निर्माण के लिए चट्टान से अनुमति मांगी। पुजारियों ने मंत्रों का जाप करके चट्टान को पवित्र और सक्रिय किया, उसके बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया है।

9- कैलाशनाथ मंदिर के निर्माण के लिए मजदूर दिन में लगभग 16 घंटे काम करते थे। उन दिनों बिजली नहीं थी, इसलिए वे गुफा के अंदर प्रकाश करने के लिए दर्पण का इस्तेमाल करते थे। क्योंकि आज भी मंदिर के अंदर काफी अंधेरा है।

10- कैलाशनाथ मंदिर को बनाने के लिए 7,000 से अधिक मजदूरों ने लगभग 150 वर्षों तक कठिन परिश्रम किया। जिसकी वजह से इस विशाल और अतुलनीय मंदिर का निर्माण हो सका है। 


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कैलाशनाथ मंदिर खुलने का समय kailasnath temple opening hours

कैलाशनाथ मंदिर पूरे सप्ताह में खुले रहता है। मंदिर सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम को 4 बजे से रात को 8 बजे तक खुला रहता है। इस समय के बीच आप कभी भी मंदिर में जा सकते हो।


पश्चिम बंगाल में स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर के बारे में जाने 


कैलाशनाथ मंदिर कैसे पहुँचें How to reach Kailasnath Temple ?

हवाई मार्ग से कैलाशनाथ मंदिर में पहुँचने के लिये छत्रपति संभाजी महाराज हवाई अड्डे से टैक्सी के माध्यम से पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी लगभग 36 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से कैलाशनाथ मंदिर में पहुँचने के लिये औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हो। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से कैलाशनाथ मंदिर में पहुँचने के लिये महाराष्ट्र राज्य के किसी भी शहर से परिवहन निगम की बसों,निजी बसों और टैक्सियों के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं।

Kailasnath Temple Road Map


कैलाशनाथ मंदिर के पास होटल (Hotels near by Kailasnath Temple)

कैलाशनाथ मंदिर के पास के होटलों की लिस्ट नीचे दी गयी है। आफ्नै सुविधानुसार आप किसी भी होटल में रुक सकते है। यह सभी होटल मंदिर परिसर से 3 से 4 किलोमीटर के अंदर स्थित हैं।

1-SSK Grand Kanchipuram.

2-Regency Kanchipuram by GRT Hotels.

3-Hotel Ramco Residency.

4-Pinetree Lodge.

5-SBK Park Inn.

6-Sivaraj Holiday Inn.

7-CJ Pallazzio Hotel.

8-Radisson Salem.

9-Grand Estancia

10-Hotel Shrie Shanth.

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FAQ

Q- एलोरा के कैलाश मंदिर का निर्माण किस राजवंश ने किया था ?

A- एलोरा के कैलाश मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट शासक राजा कृष्ण प्रथम द्वारा किया गया था।

Q- कैलाशनाथ मन्दिर कहाँ स्थित है ?

A- कैलाशनाथ मन्दिर महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद के निकट अजंता और एलोरा की गुफाओं में स्थित है।

Q- कांची का कैलाश मंदिर किसने बनवाया था ?

A- कांची का कैलाश मंदिर राजा कृष्ण प्रथम द्वारा बनवाया था।

Q- कैलाश नाथ मंदिर का निर्माण कब हुआ ?

A- कैलाश नाथ मंदिर का निर्माण सन 756 से 773 ईस्वी के बीच हुआ।

Q-पहाड़ियों को काट काट कर बनाया गया प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है ?

A- पहाड़ियों को काट काट कर बनाया गया प्रसिद्ध मंदिर का कैलाशनाथ है। 

 

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