Jageshwar Temple History In Hindi, जागेश्वर मंदिर, प्रसिद्ध शिव मंदिर, 2021

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जागेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तों स्वागत है, आप सभी का मेरे एक और नये लेख में जिसमें मैं आज आपको भगवान शिव जी के प्रसिद्ध मंदिर जागेश्वर मंदिर के बारे में बताऊँगा। यह मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर से 35 किलोमीटर आगे पिथौरागढ़ वाली रोड पर स्थित है। उत्तराखंड के हिमालयी घाटियों के बीच इस मंदिर का निर्माण 7 वीं से 14 वीं शताब्दी के बीच किया गया था। यहाँ पर 124 प्राचीन हिंदू मंदिरों का एक समूह है। इस मंदिर के प्रमुख देवता भगवान शिव जी हैं, लेकिन इस मंदिर के आस पास कई अन्य देवताओं मंदिर हैं जिनमे भगवान विष्णु, शक्ति देवी आदि प्रमुख हैं।


विषय सूची

1-  जागेश्वर मंदिर का इतिहास।

2-  जागेश्वर मंदिर की वास्तुकला।

3-  जागेश्वर मंदिर का खुलने का समय।

4-  जागेश्वर घूमने का सबसे अच्छा समय।

5-  जागेश्वर मंदिर के आसपास के दर्शनीय स्थल।

6-  जागेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे ?

 

जागेश्वर मंदिर का इतिहास History of Jageshwar Temple

जागेश्वर मंदिर की उत्पत्ति के बारे में कोई एक स्पष्ट मत नहीं है। कुछ विद्वान इसका निर्माण 7 वीं शताब्दी में मानते हैं, तो कुछ विद्वानो के अनुसार  इस मंदिर का  निर्माण 10 वीं शताब्दी के के दौरान हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी या चंद पहाड़ी राजवंशों के द्वारा किया गया था। लेकिन इन प्रस्तावों का समर्थन या खंडन करने के लिए कोई पाठ्य या अभिलेखीय साक्ष्य नहीं है। कत्यूरी राजा शालिवाहनदेव के शासनकाल के दौरान इन मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया था। मुख्य मंदिर में मल्ल राजाओं द्वारा लिखा गया एक शिलालेख है। जो जागेश्वर के प्रति उनकी भक्ति को दर्शाता है। कत्यूरी राजाओं ने इस मंदिर के रख रखाव के लिए मंदिर के पुजारियों को रहने के लिए गांव भी दान में दिए था। कुमाऊं के चंद राजाओं को जागेश्वर मंदिर का संरक्षक माना जाता है। बाद में गुर्जर प्रतिहार युग के दौरान कई जागेश्वर मंदिरों का निर्माण या जीर्णोद्धार किया गया था। जो पुजारी इस मंदिर की देखभाल करते हैं, उनको स्थानीय भाषा में पाण्डा कहते हैं।

 

जागेश्वर मंदिर की वास्तुकला Architecture of Jageshwar Temple

जागेश्वर मंदिर का निर्माण भगवान शिव जी के प्रमुख मंदिर केदारनाथ मंदिर की शैली में ही हुआ है। इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी शैली में किया गया है। इस मंदिर का निर्माण बड़े-बड़े पत्थरों को काटकर किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव का लिंग विराजमान है, और गर्भगृह के द्वार के ऊपर एक शयनकक्ष है जिसमें तीन मुख वाले भगवान शिव जी की मूर्ति बनाई गई हैं। यह पहला मंदिर है, जिसके सामने स्तंभों पर बनाया गया एक बड़ा स हॉल विराजमान हो, और इस हॉल का उपयोग धार्मिक कार्यों और यहाँ आने वाले तीर्थयात्रियों के आराम करने के लिए किया जाता है। यह मंदिर अपनी ढलाई, दीवारों, स्तम्भों और खंभों पर पाए गए छोटे शिलालेखों के लिए भी उल्लेखनीय है। मुख्य मंदिर के आस पास विभिन्न देवी देवताओं के 124 से भी अधिक मंदिर विराजमान हैं। यह मंदिर पत्थर के लिंगम, पत्थर की मूर्तियां और वेदियों पर नक्काशीओं के लिए अधिक प्रसिद्ध है।

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नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में यहाँ पर क्लिक करके जाने। 

 

जागेश्वर मंदिर का खुलने का समय jageshwar temple opening time

जागेश्वर मंदिर का खुलने का समय यहाँ के मौसम पर निर्भर करता है। गर्मियों के दौरान यहाँ का मौसम बढ़िया और आरामदायक होता है, लेकिन सर्दियों में यहाँ बहुत ठंड पड़ती है और यहाँ बर्फ भी गिरती है। इसलिए गर्मियों के समय यह मंदिर सुबह 4 बजे खुलता है और शाम को 6 बजे बंद हो जाता है, और सर्दियों के समय यह मंदिर सुबह 6 बजे खुलता है और शाम को 5 बजे बंद हो जाता है।

 

जागेश्वर घूमने का सबसे अच्छा समय best time to visit jageshwar

अगर आप जागेश्वर मंदिर जाने का मन बना रहे हो तो वहाँ घूमने के लिए अप्रैल से जून, सितंबर से नवंबर का समय सबसे अच्छा हैं। मानसून के शुरुवात में जागेश्वर जाने का सबसे अच्छा समय है। जो दर्शनीय स्थलों की यात्रा और आगे की खोज के लिए क्षेत्र के चारों ओर व्यापक यात्रा के लिए अनुकूल हैं। यहाँ के मुख्य देवता शिव जी के दो लोकप्रिय त्योहार भी एक ही मौसम में आयोजित किए जाते हैं। शिवरात्रि मेला वसंत के दौरान होता है, जबकि जागेश्वर महोत्सव मानसून के दौरान मनाया जाता है। जो यहाँ आने वाले आगंतुकों और मूल निवासियों को समान रूप से आकर्षित करता है। 

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जागेश्वर मंदिर के आसपास के दर्शनीय स्थल jageshwar temple nearby places to visit

जागेश्वर मंदिर के आने के बाद यहाँ के आस पास के कुछ प्रमुख जगहों में घूमना चाहते हो तो कुछ प्रमुख जगहों के बारे में नीचे बताया गया है। आप वहाँ जाकर घूम सकते हो।

1- पुरातत्व संग्रहालय जागेश्वर

यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बनाया गया पुरातत्व संग्रहालय है, जिसमें प्राचीन नक्काशीदार मूर्तियों और देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियों को रखा गया है। इसमे उमा-महेश्वर (पार्वती-शिव के क्षेत्रीय नाम) सूर्य देवता और नव ग्रह के देवताओं की मूर्तियाँ विराजमान हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं का संग्रहालय निस्संदेह देखने लायक है, न केवल उन लोगों के लिए जो धर्म से संबंधित हैं, या इसकी जटिलताओं से चिंतित हैं, बल्कि उन सभी के लिए है जो दुनिया के तीसरे सबसे बड़े धर्म की असली जड़ों को जानना चाहते हैं। सबसे उल्लेखनीय व्यक्ति क्षेत्र के शासकों में से एक पोना राजा का है, जो अभी भी इस क्षेत्र में अच्छी तरह से सम्मानित और याद किया जाता है।

2- दंडेश्वर मंदिर

यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इनको भगवान शिव के कर्मचारी के रूप में माना जाता है, इसलिए इसका नाम दंडेश्वर, या दंड का वाहक, कर्मचारी पड़ा है। इनको देवताओं की अपरिवर्तित प्राकृतिक रूप में पूजा करने की प्रचलित प्रथा का पालन करते हुए माना जाता है। इस देवता की मूर्ति को एक बड़ी बिना काटे चट्टान के रूप में बनाया गया है।

3- झंकार सैम मंदिर

झंकार सैम मंदिर जागेश्वर धाम के दक्षिण में स्थित है। यह मंदिर भगवान झंकार सैम को समर्पित है जो उत्तराखंड कर स्थानीय देवता हैं। इन्होंने राक्षसों को मार डाला और भगवान शिव की तपस्या को निर्बाध रूप से पर होने दिया। आप झंकार सैम मंदिर में जागेश्वर धाम से कैब द्वारा 12 मिनट में पहुँच सकते हो।

4- मिरटोला आश्रम

यह यशोदा माँ और उनके शिष्य श्री कृष्ण प्रेम द्वारा स्थापित एक छोटा सा गाँव मिरतोला आश्रम है, जो सन 1930 में तपस्वी बन गया था। इस आश्रम की सुंदरता और पूर्ण शांति आपको अपने दिल में आकर्षित करती है, जैसे कि यह आपको बुला रही हो रहना। इस आश्रम की दिव्य शांति और सुंदरता का अनुभव करें।

5- कुंजा गांव

कुंजा गांव उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की भनोली तहसील में स्थित एक सुंदर गांव है, जिसके बारे मे बहुत काम लोगों को पता है। जो जागेश्वर धाम से 15 किमी दूर है। यह गांव आपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है लेकिन पर्यटकों को इस गाँव के बारे में कम ही पता हैं। 

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महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मंदिरों के इतिहास के बारे में यहाँ पर क्लिक करके जाने। 

 

जागेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे How to reach Jageshwar Temple ?

हवाई मार्ग से जागेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डे पंतनगर एयरपोर्ट से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी 150 किलोमीटर है।

 

रेल मार्ग से जागेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 116 किलोमीटर है।

 

रोड मार्ग से जागेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिये उत्तराखण्ड राज्य के हल्द्वानी शहर से परिवहन निगम की बसों, निजी बसों और टैक्सियों के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं।

Jageshwar Temple Road Map


 

जागेश्वर मंदिर के पास स्थित होटल hotel near jageshwar temple

जागेश्वर मंदिर के पास स्थित होटलों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है। यह सभी होटल मंदिर के पास ही स्थित है। आप अपनी सुविधानुसार नीचे दिये गए किसी भी होटल में रुक सकते हैं-

1- Jageshwar Inn.

2- Manudeep Hotel and Restaurant.

3- Bharat residency.

4- Heritage Inn Jageshwer.

5- K.M.V.N Tourist Rest House Jageshwar.

6- MettāDhura.

7- Van Serai - Forest Lodge.

8- The Green Village Eco Resort.

9- Bharat Residency.

10- Itmenaan Estate.

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Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको जागेश्वर मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैंआप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

 Note        

अगर आपके पास जागेश्वर मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैंया आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं। 

 

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