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स्वर्ण मंदिर के बारे मे जानकारी, Golden Temple In Hindi, 2022


स्वर्ण मंदिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे एक और लेख में जिसमें मैं आज आपको स्वर्ण मंदिर के बारे में बताऊँगा। यह मंदिर पंजाब राज्य के अमृतसर शहर में स्थित एक विश्व विख्यात गुरुद्वारा है। जिसे स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है। स्वर्ण मंदिर अमृतसर के सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। इस मंदिर को हरमंदिर साहिब या दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है। यह सिख धर्म का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है, और अमृतसर शहर में पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र भी है।

 

स्वर्ण मंदिर, Golden Temple

विषय-सूची

1- स्वर्ण मंदिर का इतिहास।

2- स्वर्ण मंदिर की वास्तुकला।

3- स्वर्ण मंदिर खुलने का समय।

4- अकाल तख्त के बारे में जानकारी।

5- घंटाघर के बारे में जानकारी।

6- सिख इतिहास संग्रहालय के बारे में जानकारी।

7- स्वर्ण मंदिर के लंगर के बारे में जानकारी।

8- स्वर्ण मंदिर के पास घूमने वाले स्थान।

9- ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में जानकारी।

10- स्वर्ण मंदिर में कैसे पहुँचे ?

11- स्वर्ण मंदिर के पास के होटल।

12- FAQ

 

स्वर्ण मंदिर का इतिहास (Golden Temple In Hindi)

स्वर्ण मंदिर भारत में सिख धर्म के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण है। इस गुरुद्वारे की नींव की शुरुवात सन 1581 ईस्वी में सिखों के चौथे गुरू रामदास जी द्वारा की गई थी, और इसका निर्माण कार्य सन 1588 ईस्वी में पूरा हुआ था। जब यह गुरुद्वारा बनकर तैयार हुआ तो सन 1604 में सिखों के पांचवें गुरु अर्जन सिंह ने यहाँ पर सिखों का पवित्र ग्रंथ अकाल तख्त की स्थापना की थी। प्रारंभ में यह गुरुद्वारा अठ साथ तीरथ के नाम से जाना जाता था। जिस समय यह गुरुद्वारा बना उस समय भारत में मुगल शासकों द्वारा आक्रमण किया जा रहा था। अफगानिस्तान के मुगल शासकों कई बार आक्रमण करके इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। बाद में सन 1764 ईस्वी में सरदार जस्सा सिंह की निगरानी में इस मंदिर का निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया, और सन 1776 ईस्वी में यह मंदिर दोबारा बन कर तैयार हो गया। बाद में सन 1830 ईस्वी में महाराजा रणजीत सिंह ने इस गुरुद्वारे का जीर्णोद्धार करते हुये इसमें सोने का पानी चढ़ाया। सोने का पानी चढ़ाने के बाद यह मंदिर स्वर्ण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

 

स्वर्ण मंदिर की वास्तुकला (Golden Temple Architecture)

स्वर्ण मंदिर का निर्माण मुगल वास्तुकला और हिन्दू राजपूत शैली के अनुसार किया गया है। यह मंदिर अमृत सरोवर नामक झील के बीच में स्थित है। जिससे इस मंदिर की सुंदरता और बढ़ जाती है। यह मंदिर दो मंजिला संरचना में बना हुआ है। मंदिर का निचला भाग संगमरमर के पत्थरों से बना है और ऊपरी हिस्सा सोने से ढका हुआ है। इस मंदिर के ऊपर 750 किलो सोने का पानी चढ़ा हुआ गुंबद विराजमान है, और मंदिर के दरवाजों पर भी सोने का पानी चढ़ा हुआ है। स्वर्ण मंदिर के अंदर की दीवारों को शानदार पुष्प चित्रों और भित्तिचित्रों से सजाया गया है और सिख धर्मग्रंथों के छंदों को स्वर्ण अक्षरों में उकेरा गया है।

स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने के लिए चार द्वार हैं लेकिन मुख्य गुरुद्वारे में प्रवेश करने के लिए सिर्फ एक द्वार है। यह गुरुद्वारा परिसर कई इमारतों से मिलकर बना है। जिसमें मुख्य गर्भगृह, घंटाघर, एक संग्रहालय, कार्यालय और एक सामुदायिक रसोई है।

 

स्वर्ण मंदिर, Golden Temple

स्वर्ण मंदिर खुलने का समय (Golden Temple Opening Hours)

स्वर्ण मंदिर के खुलने के बारे में और वहाँ होने वाले दैनिक कार्यों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है।

मंदिर के किवाड़ खुलने का समय – सुबह 2:30 बजे।

अमृत वेला में सुबह के कीर्तन का समय – सुबह 2:30 बजे।

सुबह को श्री अकाल तख्त साहिब से पालकी साहिब के लिए प्रस्थान का समय – सुबह 4:30 बजे।

सुबह का पहला हुकमनामा – सुबह 5:00 बजे।

सुबह की पहली अरदास – सुबह 5:30 बजे।

दूसरे हुकमनामे का समय - सुबह 6.45 बजे।

दूसरे अरदास का समय - सुबह 6.45 बजे।

रात के हुकमनामे का समय – रात 9:45 बजे।

रात को श्री हरिमंदिर साहिब से पालकी साहिब के लिए प्रस्थान - रात 10.00 बजे।

स्वर्ण मंदिर रात को 10:00 बजे बंद हो जाता है।

 

अकाल तख्त के बारे में जानकारी (Information About Akal Takht)

अकाल तख्त स्वर्ण मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान है। यह तख्त सिख धर्म के अधिकारों का केंद्र माना जाता है। जिसे कालातीत (भगवान) सिंहासन के नाम से भी जाना जाता है। अकाल तख्त की स्थापना गुरु हरगोबिंद ने अपने पिता की मौत के बाद की थी। इनका मानना था कि सिख धर्म के औपचारिक, आध्यात्मिक और धर्मनिरपेक्ष मामलों के संचालन एक ही जगह से होना चाहिए, इसीलिए उन्होंने अकाल तख्त का निर्माण किया। प्रारंभ में अकाल तख्त को तख्त श्री के नाम से जाना जाता था। सिख धर्म में पांच तख्त हैं, जो सिख धर्म के सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थ स्थल माने जाते हैं। ये सभी तख्त आनंदपुर, पटना, नांदेड़, तलवंडी साबो और अमृतसर में स्थित हैं।

 

अकाल तख्त


घंटाघर के बारे में जानकारी (Information About The Clock Tower)

यह घंटाघर या क्लॉक टॉवर के बारे में बताया जाता है, कि प्राचीन समय में यहाँ पर एक विशाल इमारत थी। जिसे खोया महल के नाम से जाना जाता था। बाद में द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के दौरान अंग्रेज इस महल को तोड़ना चाहते थे, लेकिन सिख समाज ने इसका विरोध किया। अंग्रेजों ने उनके विरोध को नजरंदाज करते हुये उस महल को तोड़ कर यहाँ पर क्लॉक टॉवर का निर्माण किया था। इसका निर्माण सन 1862 ईस्वी से 1874 ईस्वी के बीच में किया गया था। बाद में कई सालों बाद सिख समुदाय ने इस क्लॉक टॉवर को तोड़ दिया था, और मंदिर के साथ इस टावर का सामंजस्य बैठाकर एक नए प्रवेश द्वार का निर्माण किया। वर्तमान समय में यहाँ पर एक घड़ी है और ऊपरी मंजिल पर एक संग्रहालय बनाया गया है।

 

अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर के बारे में जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करें। 


सिख इतिहास संग्रहालय के बारे में जानकारी (Information about Sikh History Museum)

यह संग्रहालय मुख्य घंटाघर के ऊपरी मंजिल में विराजमान है। इस संग्रहालय को सिख इतिहास संग्रहालय के नाम से जाना जाता है। यहाँ बनाए गए चित्रों में सिख गुरुओं और शहीद हुये विभिन्न लोगों को दर्शाया गया है, और साथ ही सिखों के साथ उनकी धार्मिक वस्तुओं को लेकर जो उत्पीड़न किया गया था, उसे भी यहाँ दर्शाया गया है। लेकिन वर्तमान समय में घंटाघर के पास नया भूमिगत संग्रहालय बनाया गया है। जो मंदिर के बाहर भी सिखों के इतिहास के बारे में जानकारी देता है।

 

स्वर्ण मंदिर, Golden Temple

स्वर्ण मंदिर के लंगर के बारे में जानकारी (Information About Sikh History Museum)

स्वर्ण मंदिर के अंदर एक लंगर (मुफ़्त भोजन) खिलाया जाता है। इस मंदिर परिसर में जो भी व्यक्ति आता है उसे यहाँ पर मुफ़्त में भोजन कराया जाता है। वह व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म या किसी भी समुदाय का हो, चाहे वह अमीर हो या गरीब हर इंसान को यहाँ भोजन कराया जाता है। इस लंगर में सिर्फ शाकाहारी भोजन खिलाया जाता है। यहाँ भोजन करते समय सभी लोग नीचे जमीन में बैठ कर खाते हैं। जिसे पंगत के नाम से जाना जाता है।

 

स्वर्ण मंदिर के पास घूमने वाले स्थान (Places To Visit Near Golden Temple)

अगर आप स्वर्ण मंदिर घूमने जाते हो तो उसके आस पास घूमने वाले स्थानों के बारे में नीचे जानकारी दी गयी है।

1- जलियांवाला बाग (Jallianwala Bagh)

जलियांवाला बाग एक ऐतिहासिक स्मारक है। जो अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के पास स्थित है। यह स्मारक 13 अप्रैल 1919 जलियांवाला बाग में हुये नरसंहार में मारे गए लोगों की याद में बनाया गया है। जो लगभग 7 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसमें एक संग्रहालय, गैलरी और कई स्मारक संरचनाएं का निर्माण किया गया है।

2- विभाजन संग्रहालय (Partition Museum)

यह विभाजन संग्रहालय अमृतसर शहर में स्थित है। इसका निर्माण भारत और पाकिस्तान विभाजन के दौरान हुये दंगों से संबंधित कहानियों, सामग्रियों और दस्तावेजों को दिखाने के लिया किया गया है। इस विभाजन संग्रहालय को 25 अगस्त 2017 को आम लोगों के लिए खोल दिया था।

3- दुर्गियाना मंदिर (Durgiana Temple)

दुर्गियाना मंदिर स्वर्ण मंदिर से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह अमृतसर शहर में स्थित एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर माता दुर्गा देवी को समर्पित है। दुर्गियाना मंदिर का निर्माण सन 1908 ईस्वी में हरसाई मल कपूर ने करवाया था। इस मंदिर परिसर में अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ भी विरजमान हैं।

4- हरिके वेटलैंड (Harike Wetland)

हरिके वेटलैंड के बारे में बताया जाता है, कि यह उत्तरी भारत की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि है। यह मानव निर्मित आर्द्रभूमि तरनतारन जिले में स्थित है। जो पंजाब के तीन जिलों (अमृतसर, फिरोजपुर और कपूरथला) में फैला हुआ है। यहाँ पर सांप, कछुए, उभयचरों और मछलियों की कई प्रजातियों पाई जाती है।

5- महाराजा रणजीत सिंह संग्रहालय (Maharaja Ranjit Singh Museum)

यह संग्रहालय पंजाब के शेर के नाम से मशहूर महाराजा रणजीत सिंह को समर्पित है। यह संग्रहालय अमृतसर के लॉरेंस रोड में स्थित है। इस संग्रहालय में महाराजा रणजीत सिंह की वीरतापूर्ण गतिविधियों को दर्शाया गया है, साथ ही लाइट एंड साउंड शो के द्वारा उनके युद्ध लड़ने की कला का अनुभव कराया जाता है।

 

स्वर्ण मंदिर, Golden Temple

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में जानकारी (Information about Operation Blue Star)

ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू होने से काफी समय पहले सन 1980 के दशक में स्वर्ण मंदिर और अकाल तख्त पर आतंकवादीयों ने कब्जा कर लिया था। जिनका नेतृत्व सिख कट्टरपंथी जरनैल सिंह भिंडरावाले कर रहा था। इन्होंने स्वर्ण मंदिर के आस पास बंकर और चौकियों का निर्माण शुरू कर दिया था। बाद में जून 1984 में सशस्त्र उग्रवादियों के समूह ने स्वर्ण मंदिर के अंदर आतंकवादियों हथियारों का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया, और एक अलग सिख राष्ट्र की मांग करने लग गए। उस समय की वर्तमान प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इन उग्रवादियों के खिलाफ भारतीय सेना को ब्लू स्टार नाम का सैन्य ऑपरेशन शुरू करने का आदेश दिया। इस ऑपरेशन में आधिकारिक तौर पर 492 नागरिकों और 83 सेना के जवानों की मौत हुई थी। सेना का यह ऑपरेशन सफल रहा लेकिन इस ऑपरेशन के बाद अकाल तख्त को नष्ट कर दिया गया। बाद में सन 1999 ईस्वी में सिखों ने फिर से अकाल तख्त साहिब का पुनर्निर्माण किया।

 

गोरखनाथ मंदिर के बारे में जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करें। 


स्वर्ण मंदिर में कैसे पहुँचे (How to reach Golden Temple)?

हवाई मार्ग से स्वर्ण मंदिर में पहुँचने के लिये अमृतसर हवाई अड्डे से टैक्सी या बस के माध्यम से माँ तक पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी लगभग 13 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से स्वर्ण मंदिर में पहुँचने के लिये अमृतसर जंक्शन से ऑटो टैक्सी या टैक्सी से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हो। इस जंक्शन से मंदिर की दूरी लगभग 2.5 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से स्वर्ण मंदिर में पहुँचने के लिये पंजाब राज्य के किसी भी शहर से परिवहन निगम की बसों, निजी बसों और टैक्सियों के माध्यम से मंदिर परिसर में पहुँच सकते हैं।

 

Golden Temple Road Map

स्वर्ण मंदिर के पास के होटल (Hotels near Golden Temple)

स्वर्ण मंदिर के आस पास स्थित होटलों के बारे मे जानकारी नीचे दी गयी है। आप अपनी सुविधानुसार किसी भी होटल में रुक सकते हैं। ये सभी होटल मंदिर के पास ही स्थित हैं-

1- Hotel Sarovar Regency.

2- Hotel Golden Lagoon Amritsar.

3- HOTEL MERCURY INN.

4- Hotel CJ International.

5- Hotel Sapphire Opposite Golden Temple.

6- Hotel Urban Galaxy.

7- Star Light Hotel.

8- Hotel Regal.

9- Hotel Robin.

10- Asha Guest House.

 

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको स्वर्ण मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैं, आप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

Note

अगर आपके पास स्वर्ण मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैं, या आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं।

 

FAQ

Q- स्वर्ण मंदिर में कितना सोना लगा हुआ है?

A- स्वर्ण मंदिर के ऊपरी हिस्से में 750 किलो सोने का पनि चढ़ाया गया है।

Q- गोल्डन टेंपल का हिंदी क्या होता है?

A- गोल्डन टेंपल को हिन्दी में स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है।

Q- स्वर्ण मंदिर के संस्थापक कौन थे?

A- स्वर्ण मंदिर की नीव की शुरुवात सिखों के चौथे गुरू रामदास जी द्वारा की गयी थी।

Q- स्वर्ण मंदिर का पुराना नाम क्या था?

A- स्वर्ण मंदिर को प्राचीन समय में दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है।

Q- स्वर्ण मंदिर की नींव कब और किसने रखी?

A- स्वर्ण मंदिर की नींव की शुरुवात सन 1581 ईस्वी में सिखों के चौथे गुरू रामदास जी द्वारा की गई थी।

Q- स्वर्ण मंदिर कहां स्थित है?

A- स्वर्ण मंदिर अमृतसर में स्थित हैं।

Q- स्वर्ण मंदिर कौन से राज्य में स्थित है?

A- स्वर्ण मंदिर भारत के पंजाब राज्य में स्थित है।

Q- स्वर्ण मंदिर किस नदी के किनारे स्थित है?

A- स्वर्ण मंदिर किसी भी नदी के किनारे पर स्थित नहीं है।

 

 

 

 

 

 

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