Header Ads Widget

कल्पेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी, Kalpeshwar Mandir, 2022


Kalpeshwar Temple History In Hindi

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे एक और नये लेख में जिसमें मैं आज आपको कल्पेश्वर मंदिर के बारे में बताऊँगा। कल्पेश्वर मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में भगवान शिव के पंच केदार मंदिरों में से एक है। यह मंदिर पंच केदारों का सबसे अंतिम मंदिर है। कल्पेश्वर मंदिर में जाने से पहले केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और मध्यमहेश्वर मंदिरों के दर्शन अवश्य करें। कल्पेश्वर पंच केदार मंदिरों में एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ भक्तगण पूरे वर्ष भर दर्शन के लिए जा सकते हैं। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक छोटा सा मंदिर है। इस मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को एक गुफा से होकर गुजरना पड़ता है। यह मंदिर अलकनंदा और कल्पगंगा नदियों का संगम पर विराजमान है।

 

कल्पेश्वर मंदिर,Kalpeshwar Mandir

विषय-सूची

1- कल्पेश्वर मंदिर का इतिहास।

2- कल्पेश्वर मंदिर की वास्तुकला।

3- कल्पेश्वर मंदिर का महत्व।

4- कल्पेश्वर मंदिर का खुलने का समय।

5- कल्पेश्वर मंदिर में मनाए जाने वाले त्यौहार।

6- कल्पेश्वर मंदिर के आस पास घूमने के स्थान।

7- कल्पेश्वर मंदिर में कैसे पहुँचे ?

8- कल्पेश्वर मंदिर के पास स्थित होटल।

 

कल्पेश्वर मंदिर का इतिहास History of Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों द्वारा की गई थी। महाभारत के दौरान पांडवों ने अपने परिजनों कौरवों को मार डाला था। तो पांडवों को भात्र हत्या का पाप लग गया था। इस पाप से मुक्ति के लिए ऋषि व्यास ने उन्हें भगवान शिव के पास जाने की सलाह दी, क्योंकि केवल वही उन्हें इस पाप से मुक्त कर सकते थे। भगवान शिव उनसे नाराज थे। वह पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे। उन्होंने बैल का रूप धारण करके गुप्तकाशी में एक भूमिगत सुरक्षित आश्रय में छिप गए। पांडवों ने उनके बैल रूप को पकड़ने की कोशिश की तो वह धरती के अंदर समा गए। बाद में उनके शरीर के अंग पाँच स्थानों में प्रकट हुए। जिन्हे पंच केदार कहते हैं। कल्पेश्वर में भगवान शिव की जटायें प्रकट हुई थी।

 

कल्पेश्वर मंदिर की वास्तुकला Architecture of Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर का निर्माण नागर स्थापत्य शैली के अनुसार किया गया है। इस मंदिर का निर्माण खूबसूरत पत्थरों को काटकर किया गया है। मंदिर की पूरी संरचना को ग्रेनाइट के पत्थरों को काटकर बनाया गया है। मुख्य मंदिर के ऊपर एक मीनार बनाई गई है। मंदिर के सामने एक बरामदा है जिसमें बैठकर भक्तगण मंदिर की पूजा पाठ का आनंद लेते हैं और साथ में भजन कीर्तन भी करते है। इस मंदिर के गर्भ गृह में पत्थर का शिव लिंग विराजमान है। जिसके ऊपर एक ऊंची मीनार बनाई गई है। कल्पेश्वर मंदिर के सामने एक विशाल घंटी एक पत्थर के खंभे से लटकी हुई है। मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ से आप शानदार पहाड़ों का आनंद ले सकते हो।

 

उत्तराखंड के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करें। 


कल्पेश्वर मंदिर का महत्व Significance of Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर का सबसे बड़ा महत्व है कि इस मंदिर के पुजारी दसनामी और गोसाईं हैं, जो आदि शंकराचार्य के परम शिष्य हैं। इस मंदिर के बारे में भक्तों का मानना है कि मंदिर में पूजा पाठ करने से सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है, वो इसलिए कि पौराणिक कथाओं में वर्णित है ऋषि दुर्वासा ने भगवान इंद्र को उनके पापों के लिए श्राप दिया था। तो उस पाप से बचने के लिए भगवान इंद्र ने कल्पेश्वर मंदिर में आकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान शिव ने इंद्र से प्रसन्न होकर उन्हे आशीर्वाद दिया और उन्हें अपना सिंहासन वापस पाने में मदद की।

 

कल्पेश्वर मंदिर,Kalpeshwar Mandir

कल्पेश्वर मंदिर का खुलने का समय kalpeshwar temple opening Time 

कल्पेश्वर मंदिर पंच केदारों में एक मात्र ऐसा मंदिर है। जो पूरे वर्ष भार खुले रहता है। आप इस मंदिर में दर्शन के लिए पूरे वर्ष में कभी भी जा सकते हो। यह मंदिर प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे खुल जाता है। मंदिर खुलने के बाद मंदिर में सुबह 6:00 बजे पूजा पाठ की जाती है। मंदिर खुलने के बाद पूरे दिन भर भक्तगण मंदिर में दर्शन के लिए आते रहते हैं। दिनभर खुले रहने के बाद शाम 6:00 बजे मंदिर में शाम की आरती की जाती है। शाम को आरती होने के बाद यह मंदिर 6:30 बाजे बंद कर दिया जाता है।

 

पंच प्रयाग के बारे में जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करें।


कल्पेश्वर मंदिर में मनाए जाने वाले त्यौहार Festivals Celebrated at Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर में मनाए जाने वाले कुछ प्रमुख त्योहारों के बारे में नीचे बताया गया है।

1- महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाता है। इस दिन इस मंदिर में बहुत भीड़ रहती है। शिव भक्त दूर-दूर से आकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते है और उन्हे प्रसाद चढ़ाकर उनसे आशीर्वाद लेते हैं। महाशिवरात्रि के दिन बहुत लोग भगवान शिव जी को खुश करने के लिए उपवास भी रखते हैं।

2- दशहरा

दशहरे का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के उपलक्ष में मनाया जाता है। दशहरे के दिन भगवान राम लंकापति रावण का वध करके अयोध्या वापस आते हैं। भगवान राम के अयोध्या में वापस आने और उनके स्वागत के लिए सम्पूर्ण नगर वासी अयोध्या को दीपों से जगमग कर देते हैं। उसी दिन दशहरा त्योहार मनाया जाता है। दशहरे के दिन कल्पेश्वर मंदिर को भी शानदार तरीके से सजाया जाता है।

 

कल्पेश्वर मंदिर,Kalpeshwar Mandir

कल्पेश्वर मंदिर के आस पास घूमने के स्थान Places to visit near Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर के आस पास घूमने की कुछ प्रमुख जगहों के बारे में नीचे जानकारी दी गई। आप इस स्थानों में जाकर यहाँ की सुंदरता का आनंद ले सकते हो।

1- रुद्रनाथ मंदिर

रुद्रनाथ मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। रुद्रनाथ मंदिर पंच केदार तीर्थ यात्रा में जाने वाला तीसरा मंदिर है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

2- गोर्सन बुग्याल

गोर्सन बुग्याल उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक हिमालयी अल्पाइन घास का मैदान है। यह मैदान समुद्र तल से लगभग 3519 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह सुंदर घास का मैदान कई सौ एकड़ भूमि में फ़ाइल है। इस मैदान में सेब के बाग, ओक और देवदार के जंगल पाए जाते हैं।

3- विष्णुप्रयाग

विष्णुप्रयाग अलकनंदा नदी के किनारे पर बसा पंच प्रयागों में से एक प्रयाग है। यह उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी और धौलीगंगा नदी के संगम पर स्थित है। हमारे शास्त्रों के अनुसार ऋषि नारद ने यहाँ पर भगवान विष्णु की तपस्या की थी। जिसके बाद विष्णु ऋषि नारद जी को यहाँ पर दर्शन दिए थे।

4- पंगरचुल्ला पीक ट्रेक

यदि आप रोमांचकारी शिखर चढ़ाई की तलाश कर रहे हैं तो आप पंगरचुल्ला पीक ट्रेक में आईए। यह स्थान ट्रेकिंग करने के बहुत शानदार जगह है। यह ट्रेक उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में जोशीमठ के पास स्थित है।

5- औली हिल स्टेशन

औली हिल स्टेशन उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित एक हिल स्टेशन है। यह हिल स्टेशन ढलानों पर स्थित है और इसमें दूर-दूर तक फैले घास के मैदान हैं जो आंखों को आश्चर्यजनक लगते हैं। यह प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और आसपास की पहाड़ियों का आश्चर्यजनक परिदृश्य प्रस्तुत करता है।

 

कल्पेश्वर मंदिर में कैसे पहुँचे How to reach Kalpeshwar Temple?

हवाई मार्ग से कल्पेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डे जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी 264 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से कल्पेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 248 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से तुंगनाथ मंदिर तक पहुँचने के लिए आप निजी गाड़ियों या टेक्सी से इस मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हो।

 

कल्पेश्वर मंदिर,Kalpeshwar Mandir

कल्पेश्वर मंदिर के पास स्थित होटल Hotels near Kalpeshwar Temple

कल्पेश्वर मंदिर के पास स्थित होटलों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है। यह सभी होटल मंदिर के आस पास ही स्थित है। आप अपनी सुविधानुसार नीचे दिये गए किसी भी होटल में रुक सकते हैं-

1- Hotel Vivek Palace Urgam.

2- hotel mount view annexy.

3- YATRA HOMESTAY.

4- nanda view resort.

5- The Auli Resort.

6- HOLY HEIGHTS.

7- Rukmani homestay.

8- Shivalik Camps & Resort.

9- The Sanatan.

10- NotOnMap - Mountain Studio.

 

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको कल्पेश्वर मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैं, आप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

Note

अगर आपके पास कल्पेश्वर मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी है तो आप हमारे साथ शेअर कर सकते हैं, या आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी आपको गलत लगे तो आप तुरंत हमे कॉमेंट करके बताएं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ