मध्यमहेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे एक और लेख में जिसमें मैं आज आपको मध्यमहेश्वर मंदिर के बारे में बताऊँगा। यह मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में गौंडर गांव में स्थित है। मध्यमहेश्वर को पंच केदार मंदिरों में केदारनाथ के बाद दूसरे केदार के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर समुद्र ताल से लगभग 3497 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भगवान शिव का यह मंदिर सर्दियों के मौसम में 6 महीने के लिए बंद रहता है। सर्दियों के मौसम में मध्यमेश्वर मंदिर की पालकी को ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में ले जाया जाता है। जब तक मंदिर दोबारा नहीं खुल जाता है तब तक मध्यमहेश्वर भगवान की पूजा इसी मंदिर में की जाती है। मध्यमहेश्वर प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ ट्रेकर्स के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यह स्थान कठिन ट्रेक को पसंद करने वाले ट्रेकर्स के लिए बहुत प्रसिद्ध है।


मध्यमहेश्वर मंदिर

मध्यमहेश्वर मंदिर का इतिहास  

मध्यमहेश्वर मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर के निर्माण के बारे में महाभारत के समय से जुड़ी पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के युद्ध की समाप्ति के बाद सभी पांडवों पर भ्रातृहत्या का पाप लग गया था। इस पाप से छुटकारा पाने के लिए पांडव गुरु ऋषि व्यास ने उन्हे सुझाव दिया कि अगर आप लोगों को भगवान शिव का आशीर्वाद मिल जाए तो आप लोग इस भ्रातृहत्या के पाप से मुक्त हो सकते हो। अपने गुरु की बात मानकर सभी पांडव भाई भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए निकल पड़े। भगवान शिव पांडवों भाइयों से क्रोधित थे और उन्हे दर्शन नहीं देना चाहते थे। जिस कारण भगवान शिव ने बैल का रूप धारण करके हिमालय पर्वत को ओर चले गए। भीम ने भगवान शिव को बैल रूप में पहचान लिया तो भीम ने उनको पकड़ना चाहा तो भगवान शिव का वह बैल स्वरूप धरती के अंदर समाने लगा और उनका शरीर अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो गया। मध्यमहेश्वर में उनका पेट (नाभि) मिला था। जिस स्थान पर भी भगवान शिव के शरीर के भाग प्रकट हुए थे। उस स्थान पर पांडवों ने मंदिर का निर्माण किया था। बाद में भगवान सिव उनकी भक्ति देखकर प्रसन्न हुए और उन्होंने पांडवों को दर्शन देकर भ्रातृहत्या के पाप से मुक्त किया था।

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मध्यमहेश्वर मंदिर की वास्तुकला  

मध्यमहेश्वर मंदिर का निर्माण उत्तर भारतीय शैली में किया गया है। यह मंदिर प्राचीन समय में बनाया गया एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। मध्यमेश्वर मंदिर का निर्माण हिमालय के ऊंचे पहाड़ों की तलहटी में स्थित घास के मैदानों में किया गया है। मध्यमेश्वर मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ की चोटी पर एक प्राचीन शिव मंदिर विराजमान है। जिसे लोग वृद्ध मध्यमेश्वर या पुराना मध्यमेश्वर के नाम से जानते हैं। मध्यमहेश्वर मंदिर की बनावट शैली केदारनाथ और तुंगनाथ मंदिर से काफी मिलती जुलती है। इस मंदिर के गर्भ गृह में एक प्राचीन शिवलिंग विराजमान है। जो दिखने में भगवान शिव के पेट (नाभि) के समान प्रतीत होता है। इस मंदिर के आस पास अन्य देवी देवताओं के कई और छोटे-छोटे मंदिर विराजमान हैं।

मध्यमहेश्वर मंदिर

मध्यमहेश्वर मंदिर का खुलने का समय  

मध्यमहेश्वर मंदिर पूरे वर्ष में सिर्फ 6 महीने के लिए गर्मियों के मौसम में खुलता है। सर्दियों के मौसम में बर्फबारी होने के कारण यह मंदिर 6 महीने तक बंद रहता है। मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया के दौरान सभी भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के बाद यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन सुबह 6:00 से शाम 7:00 बजे तक खुला रहता है। इस समय अवधि के दौरान भक्तगण किसी भी समय मंदिर में जाकर पूजा पाठ कर सकते है। मध्यमेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के लिंगायत ब्राह्मण जाति के लोग हैं।

2022 में मध्यमहेश्वर मंदिर की खुलने की तिथि  

मध्यमहेश्वर मंदिर के द्वार 24 मई 2022 को सभी भक्तों के खोल दिए गए है। इस दिन मध्यमेश्वर मंदिर की पालकी को ओंकारेश्वर मंदिर से वापस मध्यमेश्वर मंदिर में लाया जाएगा। पालकी के मंदिर में आने के बाद पूरे विधि विधान से उसकी पूजा पाठ की जाती है। पालकी की पूजा पाठ होने के बाद उसे मंदिर में स्थापित कर दिया जाता है। जिसके बाद इस मंदिर भक्तगण भगवान मध्यमहेश्वर के दर्शन करते हैं।

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2022 में मध्यमहेश्वर मंदिर बंद होने की तिथि  

मध्यमहेश्वर मंदिर गर्मी के मौसम के दौरान 6 महीने तक भक्तों के लिए खुला रहता है। गर्मियों के मौसम के समाप्त होने के बाद सर्दियों की शुरुवात में दीपावली के बाद मध्यमेश्वर मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

मध्यमहेश्वर मंदिर की आरती का समय  

मध्यमहेश्वर मंदिर में सुबह की आरती सुबह 6:00 बजे होती है। शाम की आरती शाम 7:00 बजे होती है।

मध्यमहेश्वर मंदिर का पता  

मध्यमहेश्वर मंदिर के पते के बारे में नीचे जानकारी दी गई है।

J6PC+3MH, मध्यमहेश्वर मंदिर ट्रेक, उत्तराखंड 246469

मध्यमहेश्वर ट्रेक  

मध्यमहेश्वर का ट्रैक शुरू करने से पहले आपको उत्तराखंड के रांसी गांव पहुंचना होगा। मध्यमहेश्वर की पैदल यात्रा काफी कठिन मानी जाती है। आपको मध्यमहेश्वर की यात्रा के दौरान आखिरी गाँव रांसी तक ही गाड़ी से जा सकते हो। वहाँ से आगे की यात्रा आपको पैदल ही करनी होती है। रांसी से मध्यमेश्वर तक का ट्रेक लगभग 18 किलोमीटर के आस पास है। इस ट्रेक को पूरा करने में आपको लगभग 8-10 घंटे लग सकते हैं। पूरे ट्रेक के दौरान आपको उत्तराखंड के कुछ गाँव मिलेंगे जहाँ से आप अपनी सुविधा का सामान या कुछ खाने पीने का सामान खरीद सकते हो। ट्रेकिंग के दौरान बेहतर होगा कि आप अपनी जरूरत का सामान अपने पास रखें।

मध्यमहेश्वर मंदिर

मध्यमहेश्वर मंदिर के आस पास घूमने के स्थान  

मध्यमहेश्वर मंदिर के आस पास घूमने वाली कुछ प्रमुख जगहों के बारे में नीचे बताया गया है। जहाँ आप परिवार के साथ घूमने जा सकते हो।

1- मंडल

मंडल गाँव उत्तराखंड का एक छोटा सुदूर गाँव है जो उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यह उन लोगों के लिए एक खूबसूरत गाँव है जो अभी तक उत्तराखंड के गांवों की यात्रा नहीं कर पाए हैं।

2- देवरिया ताल

देवरिया ताल एक पन्ना झील है जो समुद्र तल से 2438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक साफ आणि की झील है। देवरिया ताल पर्यटकों को चौखंबा चोटियों के चमत्कारी प्रतिबिंबों के साथ अपने क्रिस्टल साफ पानी पर आशीर्वाद देता है।

3- कालीमठ

कालीमठ रुद्रप्रयाग जिले में सरस्वती नदी के तट पर स्थित एक धार्मिक स्थान है। यह 1800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भारत के 108 शक्तिपीठों में से एक है। कालीमठ स्वास्थ्यप्रद और दिव्य वातावरण प्रदान करने वाली प्रकृति की गोद में स्थित है। कालीमठ में देवी काली मंदिर स्थित है।

4- गौरीकुंड

गौरीकुंड केदारनाथ के पवित्र मंदिर के लिए 16 किलोमीटर की यात्रा का प्रारंभिक बिंदु है। यह समुद्र तल से 1,982 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस स्थान का नाम भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के नाम पर रखा गया है और यहां एक मंदिर गौरी भी स्थित है।

5- गुप्तकाशी

गुप्तकाशी भगवान शिव के पवित्र मंदिर केदारनाथ से 47 किलोमीटर पहले स्थित है। यह समुद्र तल से 1319 मीटर की ऊंचाई पर मंदाकिनी नदी घाटी के पश्चिम की ओर पर केदारनाथ के मार्ग पर स्थित है। गुप्तकाशी उत्तराखंड का एक धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है क्योंकि इसमें विश्वनाथ मंदिर और अर्धनारेश्वर मंदिर जैसे प्राचीन मंदिर स्थित हैं।

मध्यमहेश्वर मंदिर में कैसे पहुँचे  ?

हवाई मार्ग से मध्यमहेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डे जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी 110 किलोमीटर है।

रेल मार्ग से मध्यमहेश्वर मंदिर में पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से टैक्सी के माध्यम से मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 107 किलोमीटर है।

रोड मार्ग से मध्यमहेश्वर मंदिर तक पहुँचने के लिए आप निजी गाड़ियों या टेक्सी से इस मंदिर परिसर तक पहुँच सकते हो।

मध्यमहेश्वर मंदिर के पास स्थित होटल  

तुंगनाथ मंदिर के पास स्थित होटलों के बारे में जानकारी नीचे दी गयी है। यह सभी होटल मंदिर के आस पास ही स्थित है। आप अपनी सुविधानुसार नीचे दिये गए किसी भी होटल में रुक सकते हैं-

1- MOON CAFE & STAY.

2- Chopta Himrab Resorts.

3- Rustic star.

4- Hotel Mountain View.

5- Hotel Chandreshwar.

6- Kedar Valley Resorts.

7- Stop-Off Cafe & Stays Chopta.

8- REVERY the tiny house.

9- The Village Retreat Resort.

10- Kedar Kashi Cottage.

Conclusion

आशा करता हूँ कि मैंने जो आपको मध्यमहेश्वर मंदिर के बारे में आपको जानकारी दी वह आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी। मैंने इस पोस्ट में इस मंदिर से संबन्धित सम्पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है।

अगर आप किसी मंदिर के बारे में जानना चाहते हो तो हमें कमेंट करके बताएं। जो भी लोग आपके आस पास में या आपके दोस्तो में मंदिरों के बारे में जानना चाहते हैं, आप उनको हमारा पोस्ट शेअर कर सकते है। हमारी पोस्ट को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।

Note

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